अंबेनली घाट (सोर्स: सोशल मीडिया) 
रायगड

अंबेनली घाट या मौत का कुआं? 8 साल में 80 से ज्यादा मौतें; आखिर क्यों इस रास्ते पर काल बन जाते हैं मोड़

Ambenali Ghat Explainer: महाराष्ट्र का अंबेनली घाट लगातार हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। जानिए क्यों 28 किमी का यह संकरा रास्ता और इसके तीखे मोड़ मुसाफिरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

आकाश मसने

Why Is Ambenali Ghat dangerous: महाराष्ट्र के सबसे खूबसूरत लेकिन उतने ही खतरनाक पहाड़ी रास्तों में शुमार महाबलेश्वर रोड का अंबेनली घाट एक बार फिर चीखों से गूंज उठा। 25 मई को सातारा और रत्नागिरी के 8 दोस्तों की हंसती-खेलती जिंदगी पल भर में खत्म हो गई। वीकेंड मनाने दापोली गए इन दोस्तों की कार पोलादपुर के पास कोहरे और तीखे मोड़ के कारण अनियंत्रित होकर 800 फीट गहरी पाताल जैसी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर यह घाट 'मौत का घाट' क्यों बनता जा रहा है?

अंबेनली घाट में 8 वर्षों में 50 बड़े हादसे

महाराष्ट्र के रायगड जिले का अंबेनली घाट पिछले कुछ वर्षों में मौत का घाट बन गया है। 25 मई को हुए एक दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की जान चली गई। पिछले 8 वर्षों में लगभग 50 बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें विभिन्न हादसों में 80 से अधिक यात्रियों की जान चली गई है।

आखिर क्यों इतने जानलेवा हैं अंबेनली घाट के मोड़?

अंबेनली घाट से रोजाना हजारों गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह सड़क बेहद संवेदनशील है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं।

  • सड़क का संकरा होना और तीखे मोड़: इस पूरे घाट सेक्शन की चौड़ाई बहुत कम है। रास्ते में ऐसे खतरनाक और तीखे मोड़ हैं जहां एक तरफ ऊंची चट्टानें हैं, तो दूसरी गहरी खाई। मोड़ पर जरा सी भी नजर चूकी, तो गाड़ी सीधे खाई में समा जाती है।
  • 28 किलोमीटर का गड्ढा जाल: पोलादपुर से महाबलेश्वर के बीच की 40 किलोमीटर लंबी सड़क में से 28 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह गड्ढों से भरा है। तेज रफ्तार गाड़ियां जब अचानक इन गड्ढों से बचने की कोशिश करती हैं, तो ड्राइवर स्टीयरिंग से नियंत्रण खो बैठते हैं।
  • सुरक्षा बैरियर का न होना: इस घुमावदार रास्ते पर मजबूत सीमेंट-कंक्रीट के सुरक्षा बैरियर की भारी कमी है। इसके अलावा, मानसून के दिनों में यहां कोहरा इतना घना होता है कि विजिबिलिटी जीरो हो जाती है, और रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड न होने से हादसे बढ़ जाते हैं।
अंबेनली घाट (सोर्स: AI)

क्या है सुरक्षा के उपाय?

विशेषज्ञों और वाहन चालकों के मुताबिक, इस रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई उपाय करने जरूरी हैं। यह घाट सड़क घुमावदार और संकरी है। इसे देखते हुए सड़क को चार-लेन वाले हाईवे बदलना जरूरी है। इसके अलावा, जिन इलाकों में भूस्खलन का खतरा रहता है वहां ढीली मिट्टी और चट्टानों को रोकने के लिए गैबियन नेटवर्क या सुरक्षा जाल लगाना जरूरी है। मॉनसून के मौसम में यह घाट सड़क अक्सर बंद रहती है, इसलिए कुंभन या दाभोल जैसे वैकल्पिक रास्ते विकसित करने की सख्त जरूरत है। साथ ही, रास्ते में खतरनाक मोड़ों पर साफ चेतावनी संकेत और स्पीड लिमिट वाले साइन बोर्ड लगाना भी जरूरी है।

अंबेनली घाट में कब-कब हुए हादसे?

  • 28 जुलाई 2018: कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की एक बस हादसे का शिकार हो गई थी। इसमें 30 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से बच गया।
  • 25 दिसंबर 2024: एक कार के खाई में गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई थी।
  • 12 मार्च 2025: एक कार के खाई में गिरने से हुई दुर्घटना में 5 लोग घायल हो गए।
  • 24 अप्रैल 2026: बाइक खाई में गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।
  • 25 मई 2026: एक स्कॉर्पियो SUV के गहरी खाई में गिरने से हुई दुर्घटना में 8 लोगों की मौत हो गई।

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