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Pune ZP Schemes: प्रशासनिक देरी और आचार संहिता के फेर में फंसी योजनाएं, किसानों व लाभार्थियों में बढ़ी निराशा

Pune Zilla Parishad: पुणे जिला परिषद की व्यक्तिगत लाभ योजनाएं प्रशासनिक खींचतान और चुनाव आचार संहिता के चलते अटक गई हैं। खरीफ सीजन बीतने के बाद भी किसानों को अनुदान नहीं मिल सका।

रूपम सिंह

Pune Zilla Parishad Beneficiary Schemes Delay: पुणे जिला परिषद की व्यक्तिगत लाभ की योजनाएं इस वर्ष प्रशासनिक देरी और अब चुनाव आचार संहिता के चलते अटक गई हैं। सितंबर 2026 तक कृषि, महिला कल्याण और पशुसंवर्धन विभाग की योजनाएं शुरू नहीं हो सकीं।

ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने को लेकर चले विवाद के कारण प्रक्रिया में देरी हुई और अब चुनाव आचार संहिता लागू होने से नए आवेदन, जांच और अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया रुक गई है। इससे किसानों और ग्रामीण लाभार्थियों में निराशा बढ़ गई है।

खरीफ सीजन में नहीं मिला कोई लाभ

जिला परिषद की योजनाओं के तहत किसानों को कृषि उपकरण और अन्य कृषि सामग्री पर अनुदान दिया जाना था। वहीं, महिला लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए आवश्यक सामग्री पर सहायता मिलनी थी।

इन योजनाओं का लाभ खरीफ सीजन की शुरुआत में मिलना अपेक्षित था, लेकिन सितंबर तक भी योजनाएं शुरू नहीं हो सकीं। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते निर्णय नहीं होने के कारण अब चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में योजनाओं की प्रक्रिया चुनाव समाप्त होने तक आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है।

जिला परिषद में वर्ष 2020 से ऑनलाइन आवेदन प्रणाली लागू है। इससे आवेदनों की जांच, दोहराव रोकने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलती रही है। हालांकि, इस वर्ष कुछ पदाधिकारियों ने ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने की मांग की।

ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन को लेकर चले विवाद में काफी समय निकल गया और योजनाओं की शुरुआत में देरी हुई। कई पंचायत समितियों की ओर से भी योजनाओं की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की गई थी। इसके बावजूद समय रहते इस संबंध में ठोस निर्णय नहीं हो सका।

आचार संहिता से रोक

पुणे शहर संभाग में चुनाव की घोषणा के साथ 23 अक्टूबर 2026 को मतदान की तारीख तय की गई है। चुनाव की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके चलते जिला परिषद की नई योजनाओं की घोषणा और उनसे संबंधित नई प्रशासनिक प्रक्रिया पर रोक लग गई है। वहीं दूसरी ओर लाभार्थियों से आवेदन स्वीकारने, उनकी प्राथमिक जांच करने और अनुदान मंजूर करने जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हुई हैं।

चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक नए प्रस्तावों अथवा नीतिगत विषयों पर निर्णय लेने में भी प्रतिबंध रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और आम नागरिकों का कहना है कि कृषि उपकरणों तथा अनुदान का लाभ खेती के मौसम की शुरुआत में मिलना चाहिए था।

कृषि सामग्री पर अनुदान खरीफ सीजन की शुरुआत में मिलना चाहिए। सितंबर बीतने के बाद भी योजनाएं शुरू नहीं हुई है। अब आचार संहिता से और देरी होगी।
यमुना इंगले, किसान, इंगले नगर, शिरूर तहसील

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