Pimpri Chinchwad water supply: एशिया की सबसे समृद्ध महानगरपालिकाओं में शुमार, देश के प्रमुख आईटी व औद्योगिक हब और 'स्मार्ट सिटी' के तमगे से नवाजे गए पिंपरी-चिंचवड़ शहर की आधी आबादी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर है। हाल ही में सामने आए महानगरपालिका (पीसीएमसी) के आधिकारिक आंकड़ों ने शहर की इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है, जिसके अनुसार क्षेत्र की लगभग 50 फीसदी सोसायटियों को अपनी मूलभूत आवश्यकता के लिए निजी टैंकर माफियाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
महानगरपालिका की स्थापना के बाद पिछले 5 दशकों में शहर का औद्योगिक और आवासीय विस्तार तेजी से हुआ है, जिससे यहां की आबादी आज 30 से 35 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। हालांकि, जिस गति से जनसंख्या और ऊंची इमारतें बढ़ीं, उस अनुपात में महानगरपालिका जल उपलब्धता, वितरण प्रणाली और अपनी टैंकर सेवा को मजबूत करने में पूरी तरह विफल रही। नतीजा यह है कि शहर की कुल 7,000 हाउसिंग सोसायटियों में से 3,000 से 3,500 सोसायटियों को विशेषकर गर्मियों के दिनों में पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वाकड, ताथवडे, तलवडे, चिखली, मोशी, भोसरी, दिघी, पिंपले गुरव और पिंपले सौदागर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में हर साल जल संकट की स्थिति और विकराल हो जाती है। इन इलाकों में एक दिन छोड़कर, वह भी बेहद कम दबाव (लो प्रेशर) से जलापूर्ति की जा रही है। मनपा के पास महज 12 टैंकर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की एक गंभीर विसंगति सामने आती है। यदि औसतन प्रत्येक प्रभावित सोसायटी को प्रतिदिन 5 टैंकर पानी की आवश्यकता हो, तो पूरे शहर में रोजाना लगभग 15,000 टैंकरों की जरूरत पड़ती है।
इसके विपरीत, करोड़ों का बजट रखने वाले महानगरपालिका के पास अपने खुद के केवल 12 टैंकर मौजूद हैं। 1 अप्रैल 2025 से 10 मार्च 2026 के बीच के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में कुल 17,122 फेरे लगाए गए। इनमें मनपा के 12 टैंकरों ने महज 4,571 फेरे पूरे किए, जबकि ठेके पर लिए गए निजी टैंकरों को 12,371 फेरे लगाने पड़े। इसके एवज में मनपा को 1 करोड़ 16 लाख 21 हजार 468 रुपये का भुगतान करना पड़ा।
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'चिखली-मोशी-चन्होली-पिपरी चिंचवड हाउसिंग सोसायटी संघटना' के अध्यक्ष संजीवन सांगले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महानगरपालिका जानबूझकर टैंकर समर्थक नीति अपना रही है और शहर में एक कृत्रिम जल संकट पैदा किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि संकट के समय निगम के पास कम से कम 300 से 400 खुद के टैंकर होने चाहिए, ताकि टैक्स भरने वाले नागरिकों को मुफ्त में पानी मिल सके। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए महानगरपालिका के मुख्य अभियंता प्रमोद ओभासे ने कहा कि मनपा के टैंकरों का इस्तेमाल केवल पीने के साफ पानी की आपूर्ति के लिए किया जाता है।
मनपा के टैंकरों का इस्तेमाल केवल पीने के साफ पानी की आपूर्ति के लिए किया जाता है, सामान्य या वाणिज्यिक उपयोग के लिए नहीं। जिन भी सोसायटियों से पीने के पानी की आधिकारिक मांग आती है, उन्हें टैंकरों के माध्यम से तुरंत पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- प्रमोद आँभासे (मुख्य अभियंता, मनपा)