राष्ट्रीय मजदूर संघ के सुनील शिंदे (फोटो नवभारत
पुणे

CNG महंगा होने पर रिक्शा चालकों को आर्थिक सुरक्षा कौन देगा? पुणे के मजदूर संघ का केंद्र व राज्य सरकार से सवाल

Sunil Shinde On Pune CNG Price Hike: पुणे में CNG 100.50 रुपये प्रति किलो होने से चालकों की आय पर असर पड़ रहा है। मजदूर संघ ने सस्ती गैस, टैक्स समीक्षा और Price Stabilisation Fund की मांग की।

आलोक उमाकृष्ण

Pune CNG Price Hike Auto Rickshaw Drivers Relief Demand: पुणे में पेट्रोल की कीमत करीब 112.02 रुपये प्रति लीटर और CNG की कीमत 100.50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पुणे भौगोलिक क्षेत्र में CNG वाहनों की संख्या 6.20 लाख से अधिक है, जबकि रिक्शों की संख्या भी एक लाख से ज्यादा हो गई है।

ऐसे में CNG की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रिक्शा चालकों की आय पर पड़ रहा है।कामगार नेता और राष्ट्रीय मजदूर संघ के अध्यक्ष नगरसेवक सुनील शिंदे ने सवाल उठाया कि जब पर्यावरण की दृष्टि से CNG अपनाने की जिम्मेदारी रिक्शा चालकों की है, तो CNG महंगा होने के बाद उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने की जिम्मेदारी किसकी है?

उन्होंने कहा कि देश में घरेलू सस्ते गैस की उपलब्धता सीमित होने के कारण सिटी गैस वितरण कंपनियों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयातित LNG सहित विभिन्न स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ती है। महंगी गैस की इस मिश्रित खरीद लागत का असर CNG के खुदरा मूल्य पर पड़ता है।

राष्ट्रीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगें

CNG क्षेत्र के लिए सस्ते APM (Administered Price Mechanism) गैस का आवंटन बढ़ाया जाए। सिटी गैस वितरण कंपनियों की महंगी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार प्रभावी नीति बनाए। CNG के लिए स्वतंत्र मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund) बनाया जाए।

CNG और PNG पर लगने वाले करों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं और वाहन चालकों को राहत दी जाए। घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस का सार्वजनिक परिवहन और घरेलू क्षेत्र के लिए प्राथमिकता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

रिलायंस सहित सभी गैस उत्पादकों से सिटी गैस वितरण के लिए उपलब्ध गैस की मूल्य संरचना में पारदर्शिता लाई जाए। CNG की कीमत तय करने में उपभोक्ता संगठनों, रिक्शा चालक संगठनों और कामगार प्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।

राष्ट्रीय मजदूर संघ का क्या है कहना?

राष्ट्रीय मजदूर संघ ने कहा कि CNG अपनाकर प्रदूषण कम करने में योगदान देने वाले रिक्शा चालकों पर बढ़ती ईंधन लागत का पूरा बोझ डालना उचित नहीं है। पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ ही रिक्शा चालकों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।

- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट

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