Pune Shirur APMC Jambut Sub Market: पुणे जिले के शिरूर कृषि उपज बाजार समिति के अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया जांबूत उप-बाजार पिछले 15 वर्षों से बंद पड़ा है। संचालन नहीं होने के कारण यह परिसर अब असामाजिक तत्वों, शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन गया है। किसानों का आरोप है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह परियोजना शुरू नहीं हो सकी।
टाकली हाजी, जांबूत, कवठे येमाई, पिंपरखेड, चांडोह और वडनेर सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों किसान इस उप-बाजार के शुरू होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में प्याज, टमाटर, अनार और अन्य सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, लेकिन स्थानीय बाजार उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जांबूत उप-बाजार में नीलामी और व्यापार के लिए आवश्यक भवन, दुकानें तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार हैं। क्षेत्र की सड़कों में भी सुधार किया जा चुका है, जिससे परिवहन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसके बावजूद बाजार समिति और प्रशासन अब तक बाजार को शुरू नहीं कर पाए हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय बाजार बंद होने का फायदा उठाकर कई व्यापारी खेतों और सड़कों पर पहुंचकर किसानों से कम कीमत पर उपज खरीद रहे हैं। खुली नीलामी की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों का आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ उनकी आय भी प्रभावित हो रही है।
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पुणे स्थानीय किसानों का कहना है कि हर चुनाव में जांबूत उप-बाजार शुरू करने का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है। किसान राजेश देवड़े ने कहा कि सभी बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद बाजार को बंद रखना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि किसानों के हित में इस उप-बाजार को जल्द से जल्द शुरू किया जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।