Sharad Pawar Baramati Bypoll Strategy (डिजाइन फोटो) 
पुणे

'बहू के लिए चाणक्य बने शरद पवार', सुनेत्रा के निर्विरोध निर्वाचन के लिए पर्दे के पीछे निभाई अहम रणनीतिक भूमिका

Sharad Pawar Baramati Bypoll Strategy: सुनेत्रा पवार के लिए शरद पवार ने चली चाणक्य नीति। मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर कांग्रेस को बारामती उप चुनाव से पीछे हटने के लिए मनाया।

अनिल सिंह

Sharad Pawar vs Congress Baramati: महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार को एक ऐसा खिलाड़ी माना जाता है जो शतरंज की बिसात पर चालें चलने से पहले ही परिणाम तय कर देते हैं। बारामती उपचुनाव में अपनी बहू सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचन के लिए उन्होंने जिस तरह से पर्दे के पीछे रणनीतिक भूमिका निभाई है, उसने एक बार फिर उनके 'चाणक्य' होने के दावे को पुख्ता कर दिया है।

शुरुआत में कांग्रेस इस सीट पर आकाश मोरे को उतारकर चुनाव लड़ने पर अड़ी थी। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया था कि लोकतंत्र में चुनाव होना आवश्यक है। लेकिन 9 अप्रैल की दोपहर तक कांग्रेस का अचानक 'पीछे हटना' कोई संयोग नहीं, बल्कि शरद पवार की सूक्ष्म कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है।

खड़गे को फोन और 'परिवार प्रमुख' की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, जब राज्य स्तर के कांग्रेस नेताओं ने सुनेत्रा पवार को 'वॉकओवर' देने से इनकार कर दिया, तब शरद पवार ने सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क साधा। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को फोन किया।

इस बातचीत के दौरान पवार ने महाराष्ट्र की उस पुरानी राजनीतिक परंपरा का हवाला दिया, जिसमें किसी वरिष्ठ नेता के निधन के बाद उनके परिवार के सदस्य के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह बात राकांपा (SP) प्रमुख के नाते नहीं, बल्कि पवार परिवार के मुखिया के रूप में कर रहे हैं। इस भावनात्मक और रणनीतिक अपील के बाद खड़गे ने कांग्रेस उम्मीदवार को नामांकन वापस लेने का निर्देश देने का आश्वासन दिया।

राज्य के नेताओं को दिल्ली से 'संदेश'

शरद पवार की दिल्ली में सक्रियता के बाद ही महाराष्ट्र कांग्रेस के सुर बदले। विजय वडेट्टीवार जैसे कद्दावर नेताओं ने अचानक 'जनभावना' का हवाला देते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी प्रक्रिया में है, लेकिन यह स्पष्ट हो चुका है कि कांग्रेस आलाकमान के आदेश पर ही राज्य इकाई ने अपने कदम पीछे खींचे हैं।

सुनेत्रा के लिए राह हुई साफ

दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे सुनेत्रा पवार के लिए प्रचार नहीं करेंगे, क्योंकि उनकी पार्टी का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है। लेकिन पर्दे के पीछे उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनकी बहू को किसी बड़ी चुनौती का सामना न करना पड़े।

राजेश विटेकर और मकरंद आबा पाटिल जैसे एनसीपी नेताओं का कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मिलना इस बात का संकेत है कि अब औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। 9 अप्रैल की शाम तक बारामती उपचुनाव के निर्विरोध होने की आधिकारिक पुष्टि होने की पूरी संभावना है, जिसका श्रेय सीधे तौर पर शरद पवार की कूटनीति को जाता है।

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