Pune Saswad Municipal Council ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
पुणे

पुणे: स्वच्छता में नंबर वन सासवड़, राष्ट्रीय सम्मान मिला, लेकिन 7.5 करोड़ की पुरस्कार राशि अटकी

Pune Saswad Municipal Council: स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल रहने के बावजूद सासवड़ नगर परिषद को 7.5 करोड़ की पुरस्कार राशि और 15वें वित्त आयोग की निधि अब तक नहीं मिली है।

अंकिता पटेल

Pune Swachh Survekshan: पुणे सासवड़ नगर परिषद ने अपनी कार्यक्षमता के दम पर स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया है। 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2023' में देश में प्रथम स्थान और 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2024' में 'स्वच्छ सुपर लीग' में शानदार प्रदर्शन के बाद सासवड़ का नाम पूरे देश में गूंज उठा।

लेकिन विडंबना यह है कि जिस उपलब्धि के लिए सासवड़ को सम्मानित किया गया, उसी उपलब्धि के तहत मिलने वाली 7।5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि सरकारी लालफीताशाही के कारण अभी तक परिषद के खाते में नहीं पहुंची है।

नगर परिषद केवल पुरस्कार राशि की कमी से ही नहीं जूझ रही, बल्कि पिछले तीन वर्षों से 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली महत्वपूर्ण निधि भी प्राप्त नहीं हुई है। इस वित्तीय सूखे ने सासवड़ नगर परिषद की कमर तोड़ दी है।

राज्य और केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान के अभाव में परिषद को अपने दैनिक कार्यों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में स्वच्छता का परचम लहराने वाले इस निकाय को अब अपने बुनियादी अस्तित्व के लिए फंड की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।

सासवड़ नगर परिषद के पास आय के स्रोत अत्यंत सीमित हैं, जबकि शहर की अनिवार्य सेवाओं का खर्च करोड़ों में है। नप को अपने आरोग्य कर्मचारियों का वेतन अपने निजी कोष से देना पड़ रहा है।

इसके अलावा, पूरे शहर को पानी की आपूर्ति करने वाली वीर बांध उपसा योजना का मासिक बिजली बिल भी लाखों में आता है, जिसका भुगतान करना अब परिषद के लिए दूभर होता जा रहा है।

निधि की कमी के कारण शहर के नए विकास कार्यों पर अघोषित 'ब्रेक' लग गया है, जिससे प्रशासन के सामने शहर के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

एक महीने के वेतन का अंतरिम समाधान

हाल ही में चुने गए नए पार्षदों के सामने जब यह आर्थिक संकट रखा गया, तो प्रशासन ने एक अस्थायी रास्ता निकाला। नगर परिषद के अपने फंड की स्थिति का जायजा लेने के बाद, सफाई कर्मचारियों के एक महीने के लंबित वेतन का भुगतान करने का निर्णय लिया गया, इसके लिए संबंधित ठेकेदार को एक महीने के वेतन का वेक जारी कर दिया गया है।

मुख्याधिकारी डॉ. कैलाश चव्हाण ने बताया कि शासन स्तर पर लगातार पत्र-व्यवहार जारी है और जैसे ही निधि प्राप्त होगी, सभी बकाया भुगतान प्राथमिकता के आधार पर निपटाए जाएंगे।

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