Purandar Fort Entry Ban: प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक पुरंदर किले पर आगामी 22 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पर्यटकों, दुर्ग प्रेमियों और शिवभक्तों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सेना प्रशिक्षण केंद्र (पुरंदर) और सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशानुसार यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
प्रशासन के अनुसार, किले के संपर्क मार्गों तथा खतरनाक घाटियों के तत्काल मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र सेना का संवेदनशील प्रशिक्षण केंद्र होने के साथ-साथ वन्यजीव विभाग के 'कोर जोन' में आता है। बढ़ती भीड़ से सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव और पर्यावरण की क्षति को देखते हुए यह रोक लगाई गई है।
पुरंदर किला परिसर में भारतीय सेना का प्रशिक्षण केंद्र स्थित होने के कारण यह एक अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र है। हाल के दिनों में वीकेंड और छुट्टियों के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ जुटने से सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बन रहा था।
सैन्य अधिकारियों ने क्षेत्र की संवेदनशीलता और सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का सुझाव दिया था।
इसी सुझाव पर अमल करते हुए प्रशासन ने अस्थायी रूप से आम नागरिकों और पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला लिया है। मानसून के बाद किले की ओर जाने वाले रास्तों और खतरनाक घाटियों की स्थिति जर्जर हो गई थी, जिनकी तत्काल मरम्मत आवश्यक थी।
निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना से बचने के लिए मार्गों को पूरी तरह बंद रखना जरूरी था। प्रशासन का मानना है कि निर्माण कार्य के बीच पर्यटकों की आवाजाही से न केवल काम में बाधा आती, बल्कि यात्रियों की जान को भी खतरा हो सकता था। इसलिए मरम्मत कार्य को निर्बाध और समय पर पूरा करने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है।
पुणे शहर के पुरंदर का यह ऐतिहासिक परिसर समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास स्थान है।
कोर जोन में अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों और गाड़ियों के शोर से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा था।
10 अक्टूबर तक लागू रहने वाले इस प्रतिबंध से प्रकृति को पुनर्स्थापित होने का अवसर मिलेगा।
प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें और 10 अक्टूबर के बाद ही पुरंदर किले की यात्रा का नियोजन करें।