पुणे महानगरपालिका (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणेकरों के लिए खुशखबरी, 566 MLD तक बढ़ेगी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता, पानी होगा और भी साफ

Pune Municipal Corporation ने अपने क्षेत्र में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी के आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा अहम फैसला लिया गया है।

अपूर्वा नायक

Pune News: पुणे महानगर पालिका क्षेत्र में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अमृत-2 योजना के तहत 842 करोड़ 84 लाख 68 हजार 597 रुपये की मंजूरी दी गई है।

इस परियोजना में केंद्र सरकार 252.86 करोड़ रुपये, राज्य सरकार 210.71 करोड़ रुपये और पुणे महानगर पालिका 20.90 करोड़ रुपये का योगदान देगी। इसके अलावा 358 करोड़ रुपये की व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल से की जाएगी। इस निर्णय की जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्विटर पर साझा की।

नदियों व जलाशयों में प्रदूषण बढ़ रहा

वर्तमान में पुणे महानगर क्षेत्र में 9 एसटीपी कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 477 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है। लेकिन यह क्षमता शहर की जनसंख्या और सीवेज उत्पादन के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। पुरानी तकनीक और सीमित क्षमता के कारण नदियों व जलाशयों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कई वर्षों से इन केंद्रों के नवीनीकरण और क्षमता वृद्धि की मांग की जा रही थी। इसी के मद्देनजर महानगर पालिका ने प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार को भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है।

आधुनिक एसबीआर तकनीक का उपयोग

इस परियोजना से भैरोबा, तानाजीवाड़ी और बोपोडी केंद्रों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एरंडवणे केंद्र की तकनीक अपग्रेड होगी, जबकि विठ्ठलवाड़ी और डॉ। नायडू केंद्र का नूतनीकरण किया जाएगा। मुंढवा, खराड़ी और बाणेर केंद्र पहले से ही आधुनिक एसबीआर तकनीक पर आधारित हैं, इसलिए उनका नूतनीकरण आवश्यक नहीं है। इस परियोजनानागरिकों को स्वच्छ पर्यावरण मिलेगा और भविष्य में जनसंख्या वृद्धि के साथ आने वाली चुनौतियों का भी सामना किया जा सकेगा।

पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी

  • इन सुधारों के बाद पुणे की कुल सीवेज शोधन क्षमता 89 एमएलडी बढ़कर 566 एमएलडी हो जाएगी। परियोजना में नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा तय किए गए नए मानक पूरे किए जा सकेंगे।
  • इस योजना के क्रियान्वयन में 2 से 3 वर्ष का समय लगने का अनुमान है। निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तीन ठेकेदारों की बोलियों की जांच की जा रही है। परियोजना पूरी होने पर शहर की सीवेज प्रबंधन प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरेगी।
  • इस परियोजना के पूरा होने के बाद पुणे में सीवेज शोधन क्षमता बढ़ेगी, प्रदूषण घटेगा और नदियों में गंदे पानी का प्रवाह कम होगा।

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