पुणे जिला परिषद ( सोर्स: सोशल मीडिया )  
पुणे

पुणे जिला परिषद में 51 सीटों के साथ एनसीपी बहुमत, अब अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर सियासी घमासान

Pune Zilla Parishad: पुणे जिला परिषद में 73 में से 51 सीटें जीतकर एनसीपी को बहुमत। अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर पार्टी में अंदरूनी सियासत तेज।

अंकिता पटेल

Pune Zilla Parishad NCP Majority: पुणे जिला परिषद के चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की प्रचंड जीत के बाद अब जिले की राजनीति का केंद्र 'अध्यक्ष' और 'उपाध्यक्ष' की कुर्सी बन गया है।

जहां एक ओर प्रशासनिक स्तर पर नए पदाधिकारियों के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर एनसीपी के भीतर मलाईदार पदों को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरु हो गई है। 73 में से 51 सीटों पर जीत दर्ज कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने जिला परिषद पर अपना एक तरफा कब्जा जमा लिया है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पाटी ने जिला परिषद पर जमाया एक तरफा कब्जा

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी आलाकमान अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों के लिए किन चेहरों पर दांव लगाता है। पार्टी को पश्चिमी महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए विभिन्न तालुकों (जैसे बारामती, आंबेगांव, इंदापुर) के बीच संतुलन बनाना होगा। चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दी जा सकती है, ताकि ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ और मजबूत हो सके। राज्य सरकार का ग्राम विकास विभाग जल्द ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। जिला परिषद भवन में केवल एक ही चर्चा चल रही है कि "कौन बनेगा पुणे का ग्रामीण मुख्यमंत्री ?"

पुणे जिप का राजनीतिक विश्लेषण

एनसीपी के इस भारी बहुमत के बाद विपक्षी सोमे (बीजेपी और अन्य) की भूमिका केवल प्रतीकात्मक रह गई है। हालांकि, असली चुनौती एनसीधी के भीतर ही है, जहां कई वरिष्ठ सदस्य सभापति और महत्वपूर्ण समितियों के पदों के लिए लॉबिग कर रहे है। पुणे जिला परिषद को अक्सर राज्य की राजनीति का 'प्रवेश द्वार' माना जाता है, इसलिए यहां की नियुक्तियां भविष्य की राजनीति के संकेत देंगी,

प्रशासनिक तैयारीः नए दफ्तर और नई गाड़ियां

पदाधिकारियों की घोषणा से पहले ही पुणे जिला परिषद प्रशासन 'एक्शन मोड में आ गया है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विभिन्न समितियों के सभापतियों के कार्यालयी की मरम्मत और रंग-रोगन का काम युद्धस्तर पर जारी है।

प्रशासन ने दो नए वाहन (बोलेरो) खरीदने का निर्णय लिया है। प्रशासनिक राजवट के दौरान पदाधिकारियों की गाड़ियां बीडीओ स्तर के अधिकारियों को आवंटित कर दी गई थी।

अब उन्हें वापस मंगाकर दुरुस्त किया जा रहा है। साल 2020 में खरीदी गई टोयोटा इनोव्हा अभी भी बेहतरीन स्थिति में है, जिसे वर्तमान में सीईओ इस्तेमाल कर रहे थे। अब यह गाड़ी फिर से नए अध्यक्ष की सेवा में तैनात होगी।

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