परंपरा को नई उड़ान: आधुनिक दौर में विरासत जिंदा, युवाओं ने शुरू की बैलगाड़ी तीर्थयात्रा; जेजुरी की ओर निकला का

Pune Bailgadi Wari: मांदारने (जुन्नर) के युवाओं ने कुलदैवत खंडोबा के प्रति श्रद्धा जताते हुए 10 बैलगाड़ियों के साथ जेजुरी गढ़ की पारंपरिक वारी शुरू की।
Tradition takes new flight: Heritage lives on in modern times, youth begin bullock cart pilgrimage; car sets off for Jejuri
बैलगाड़ी तीर्थयात्रा ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Maharashtra Culture Hindi News: पुणे आज के रफ़्तार भरे युग में जहां लोग चंद घंटों में मीलों की दूरी तय करना चाहते हैं, वहीं पुणे जिले के मांदारने (जुन्नर) के युवाओं ने पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखते हुए एक मिसाल पेश की है। अपने कुलदैवत भगवान खंडोबा के प्रति अटूट श्रद्धा प्रकट करते हुए, इन युवाओं ने सुख-सुविधाओं का त्याग कर 'बैलगाड़ी वारी' के जरिए जेजुरी गढ़ की तीर्थयात्रा शुरू की है।

परंपरा और विरासत का संगम

मांदारने गांव के बुजुर्गों द्वारा दशकों पहले शुरू की गई इस बैलगाड़ी यात्रा को नई पीढ़ी ने पूरे उत्साह के साथ अपनाया है। 'येलकोट-येलकोट जय मल्हार' के उद्घोष के बीच जब ये 10 सजी-धजी बैलगाड़ियां सड़कों पर उत्तरी, तो हर कोई इस दृश्य को देखता रह गया। युवाओं का मानना है कि बंद गाड़ियों के बजाय बैलगाड़ी की धीमी चाल और बैलों के गले में बंधी घंटियों की गूंज में जो आत्मिक शांति मिलती है, वह अद्भुत है।

9 दिनों की कठिन तपस्या यह

यात्रा केवल दर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि एक अनुष्ठान है, 5 दिन की जाने की यात्रा और वापसी मिलाकर कुल 9 दिनों तक यह जत्था सड़कों पर रहेगा। वारी के साथ एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी है, जिसमें बैलों के लिए चारा, पानी, चूल्हा-बर्तन और तंबू जैसी बुनियादी जरूरतें शामिल हैं।

मिली आत्मिक शांति, शिवजयंती पर भक्ति का उल्लास

गांव में एक शोकपूर्ण घटना के कारण महाशिवरात्रि पर वारी नहीं निकल सकी थी, इसलिए युवाओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती को प्रस्थान के लिए चुना। शुभम महाकाल, राजेंद्र सोनवणे, संतोष महाकाल और संभाजी चौधरी के नेतृत्व में यह यात्रा निकाली गई।

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