पुणे में फिलहाल 10% पानी कटौती जारी रहेगी, अतिरिक्त कटौती पर रोक।
शहर को मंजूर 11.33 टीएमसी पानी पर महापौर ने जताया असंतोष।
सालभर नियमित जलापूर्ति के लिए दीर्घकालीन जल प्रबंधन योजना का प्रस्ताव।
Pune Water Supply Canal Committee Meeting: पुणेकरों को फिलहाल अतिरिक्त पानी कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। महापौर ने प्रशासन को नहर समिति की बैठक तक मौजूदा व्यवस्था जारी रखने और कटौती नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। शहर की जरूरत के मुकाबले कम पानी का कोटा मंजूर होने पर महापौर ने असंतोष जताया है। वहीं, भविष्य में पानी की किल्लत से बचने और नागरिकों को सालभर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मनपा में व्यापक जल प्रबंधन योजना तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
पुणे मनपा ने शहर की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग के समक्ष पानी का बजट पेश किया था। इसके बावजूद विभाग ने शहर के लिए 11.33 टीएमसी पानी मंजूर किया है। मनपा के अनुसार, पुणे को पिछले वर्ष की तरह कम से कम 16 टीएमसी पानी मिलना चाहिए। इस लिहाज से मंजूर कोटा करीब 5 टीएमसी कम है। शहर में पहले से 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू है। राज्य सरकार ने बांधों में उपलब्ध पानी को पेयजल के लिए आरक्षित रखा है।
वर्तमान में बांधों में करीब 24 टीएमसी पानी उपलब्ध होने के बावजूद पुणे के लिए कम कोटा मंजूर होने से कटौती बढ़ने की आशंका बनी हुई थी। पानी के मुद्दे पर बुधवार को प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई है।
अब नहर समिति की बैठक के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा 10 प्रतिशत कटौती जारी रहेगी।
शहर की बढ़ती आबादी, तेजी से हो रहे शहरीकरण और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए मनपा में दीर्घकालीन जल प्रबंधन योजना बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
स्थायी समिति के नगरसेवक हरिदास कृष्णा चरवड ने पुणे शहर, उपनगरों और नए शामिल गांवों के लिए सालभर नियमित जलापूर्ति का नियोजन करने की मांग की है।
प्रस्ताव में एक दिन छोड़कर पानी देने या आपूर्ति के दिन कम करने जैसे विकल्पों के बजाय प्रतिदिन नियमित जलापूर्ति की संभावना का तकनीकी और व्यावहारिक अध्ययन करने पर जोर दिया गया है।
इसके लिए उपलब्ध जल भंडार, बढ़ती आबादी, वितरण व्यवस्था और पानी की बर्बादी का आकलन करने की मांग की गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, मुख्य जलवाहिनियों, वितरण पाइपलाइनों और वाल्व की जांच कर लीकेज खोजने तथा उनकी मरम्मत के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए। अवैध नल कनेक्शनों और पीने के पानी के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए भी कार्रवाई की मांग की गई है।बड़ी आवासीय सोसायटियों, मॉल और व्यावसायिक परिसरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चालू रखने तथा बंद या ठीक से काम नहीं करने वाले संयंत्रों पर नियमानुसार कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया है।
पुणे मनपा के उद्यानों और सड़क डिवाइडरों पर लगे पौधों की सिंचाई के लिए उपचारित पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की मांग भी की गई है। वाहन धुलाई केंद्रों में पीने के पानी के बजाय वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग और नागरिकों को पानी बचाने के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।
प्रस्ताव में मनपा के जलापूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट, उद्यान और निर्माण विभागों के साथ सिंचाई विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य पुणे शहर, उपनगरों और नए शामिल गांवों में उपलब्ध पानी का बेहतर नियोजन करना तथा नागरिकों को समान रूप से जलापूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करना है।