इंसान से लेकर वन्यजीव तक बेहाल, 6 कृत्रिम जलस्रोतों में भराया पानी सोर्स: सोशल मीडिया
पुणे

पुणे के पुरंदर में गहराया जलसंकट,इंसान और वन्यजीव बूंद-बूंद पानी को तरसे;जंगलों में भरे जा रहे कृत्रिम जलस्रोत

Pune Purandar Water Crisis Wildlife: पुणे के पुरंदर में कम बारिश से पेयजल संकट गहराया है। वाल्हे के जंगलों में वन्यजीवों के लिए छह कृत्रिम जलस्रोतों में टैंकर और बोरवेल से पानी भराया जा रहा है।

मनीषा बोंदरे

Pune Purandar Walhe Forest Wildlife Water Crisis: पुणे के पुरंदर तहसील में कम बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। कई कुएं और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने से ग्रामीण टैंकरों पर निर्भर हैं। वहीं वाल्हे क्षेत्र के जंगलों में पानी की कमी के कारण वन्यजीव रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच रहे हैं। वन विभाग ने भवानी माता मंदिर पहाड़ी क्षेत्र के छह कृत्रिम जलस्रोतों में पानी भरना शुरू किया है।

कम बारिश से गांवों में गहराया पेयजल संकट

पुरंदर तहसील में इस वर्ष कम बारिश के कारण जलसंकट गंभीर हो गया है। रात्र क्षेत्र की कई बस्तियों में कुएं, नलकूप और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने से ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई बस्तियों में नियमित टैंकर सेवा शुरू करने की मांग उठ रही है।

राख क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। गोरे खंडाले बस्ती, पड़लकर बस्ती, करे बस्ती, आलगुजदरा और कापड़दरा सहित कई वाड़ियों में पेयजल संकट गहरा गया है। गोरे खंडाले बस्ती में फिलहाल टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।

12.57 करोड़ की जल जीवन मिशन योजना अधूरी

राख गांव में हर घर जल पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत 12 करोड़ 57 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। हालांकि, प्रशासनिक शिथिलता, ठेकेदारों की लापरवाही और निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

ऐसे में पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे पानी के टैंकर ग्रामीणों के लिए फिलहाल मुख्य सहारा बने हुए हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और जलापूर्ति विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

जंगलों में सूखे प्राकृतिक जलस्रोत

वाल्हे क्षेत्र के जंगलों में भी पानी की कमी का असर दिखाई दे रहा है। बारिश कम होने के कारण प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए हैं। पानी और भोजन की तलाश में चिंकारा हिरण, भेड़िए और पक्षी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने लगे हैं। इससे वन्यजीवों और आबादी के बीच संपर्क बढ़ने की आशंका है।

छह कृत्रिम जलस्रोतों में भराया जा रहा पानी

वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए वन विभाग ने भवानी माता मंदिर पहाड़ी क्षेत्र में बनाए गए छह कृत्रिम जलस्रोतों में टैंकरों और बोरवेल के माध्यम से पानी भरना शुरू किया है। ग्रामीणों ने वन क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त चारा और छाया की व्यवस्था करने की भी मांग की है।

विभागीय वन अधिकारी अमोल थोरात के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कृत्रिम जलस्रोतों में नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। राजमार्गों और रेलवे ट्रैक के समीप गश्त भी बढ़ाई गई है, ताकि वन्यजीव हादसों का शिकार न हों। वन क्षेत्र में चारे और छाया की उपलब्धता के लिए भी त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

क्या CEC अकेले ले सकते हैं बड़े फैसले? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा SC

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द, UP पर 10 लाख जुर्माना

दिल्ली के इंदिरा भवन में CWC की बैठक, CEC को कहा मोदी सरकार की कठपुतली; इस्तीफे की मांग की

भारत को मिला अफगानिस्तान का नया रास्ता, 730 किमी चाबहार-जहेदान रेल लिंक पूरा, 3-4 महीने में दौड़ेगी ट्रेन

देश के कई हिस्सों में NIA की ताबड़तोड़ कार्रवाई; असम, बंगाल और केरल में तलाशी अभियान