प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI) 
पुणे

महिला को प्रेग्नेंट करो और पाओ इनाम, वीडियो कॉल...AI वीडियो से ठग रच रहे नया जाल

Pune Fraud News: पुणे के एक ठेकेदार से 'प्रेग्नेंट जॉब ऑफर' के नाम पर 11 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। ठगों की नई जेनरेशन चाहत, लालच और शर्म का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रही है।

आकाश मसने

Pune Pregnant Job Service Fraud: दुनिया के डिजिटल हो जाने के साथ ही, साइबर ठगी का एक नया और घातक रूप सामने आया है, जिसमें लालच, झूठ और टेक्नॉलजी का कॉम्बिनेशन होता है। पुणे के एक ठेकेदार की कहानी इसी नई ठगी का चौंकाने वाला उदाहरण है।

इस ठेकेदार ने इंटरनेट पर एक अनोखा विज्ञापन देखा, जिसमें लिखा था, "Looking for a man who can make me pregnant" यानी, कोई ऐसा पुरुष चाहिए जो मुझे प्रेग्नेंट कर सके, जिसके बदले इनाम मिलेगा। इस ऑफर को देखकर ठेकेदार ने जिज्ञासावश इस राह को चुना।

ऐसे करते है ठगी

शुरुआत में सब कुछ असली लगा। उसे एक महिला का वीडियो भेजा गया, जिसके चेहरे पर मासूमियत, आवाज में भरोसा और बातों में दर्द की कहानी थी। महिला ने कहा कि वह बच्चा चाहती है, लेकिन समाज और हालात इजाजत नहीं देते। भावनाओं का ऐसा जाल बुना गया कि पीड़ित ने संदेह करना छोड़ दिया।

इसके बाद ठगी का दूसरा चरण शुरू हुआ। कुछ नए नंबरों से कॉल आने लगे और बताया गया कि यह एक सीक्रेट सर्विस है, जिसे 'प्रेग्नेंट जॉब' या 'प्लेबॉय सर्विस' कहा जाता है। उसे बताया गया कि इस काम के लिए 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक का भुगतान मिलेगा!

भुगतान हासिल करने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी थीं और ये औपचारिकताएं थीं पैसे। ठगों ने बार-बार रजिस्ट्रेशन फीस, मेंबरशिप फीस, कॉन्फिडेंशियलिटी शुल्क, मेडिकल जांच शुल्क, और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर रकम मांगी। ठेकेदार को यह यकीन दिलाया गया कि बस थोड़ा सहयोग कीजिए, बाकी सब सिस्टम संभाल लेगा।

ठेकेदार को 11 लाख का लगाया चूना

इन बहानों के चलते, ठेकेदार ने करीब 11 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। उसे हर भुगतान के बाद कहा गया कि यह आखिरी स्टेप है, फिर पैसा उसके अकाउंट में आ जाएगा। लेकिन आखिरी स्टेप कभी नहीं आया। सारे नंबर बंद हो गए, लिंक गायब हो गए और वह महिला फिर कभी ऑनलाइन नहीं आई। तब जाकर ठेकेदार को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार बना है।

पुलिस के अनुसार, यह कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं, बल्कि पूरे देश में फैला एक संगठित साइबर गैंग है। यह ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ बिहार के नवादा जिले से शुरू हुई और धीरे-धीरे महाराष्ट्र, यूपी, एमपी, गुजरात और राजस्थान तक फैल गई है।

पुलिस अफसर चंद्रशेखर सावंत बताते हैं कि पीड़ित सीधा पुलिस के पास नहीं आते, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनका मजाक उड़ाएंगे या समाज उन्हें गलत समझेगा। ठगों की यह नई पीढ़ी हाई-स्पीड इंटरनेट, AI से बने वीडियो, डिजिटल QR कोड, वॉट्सऐप कॉल पर दिलकश बातों और इंसानी मानसिकता की गहरी समझ का इस्तेमाल करती है।

वे खुद को 'ऑफिशियल' दिखाने के लिए PAN, आधार, बैंक डिटेल्स लेते हैं और फर्जी दस्तावेज (जैसे बेबी बर्थ एग्रीमेंट) तक देते हैं। जानकारों ने सलाह दी है कि सीक्रेट, गुप्त, प्राइवेट जैसे शब्द वाले किसी भी असामान्य ऑफर से सावधान रहें, क्योंकि कोई भी असली काम पैसे देने से नहीं, कमाने से शुरू होता है।

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