पुणे पोर्शे कार एक्सीडेंट केस के नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे पोर्शे केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! नाबालिग आरोपी के पिता को विशाल अग्रवाल को दी जमानत

Pune Porsche Accident Case Update: पुणे के चर्चित कल्याणी नगर पोर्श एक्सीडेंट केस में सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी है।

आकाश मसने

Vishal Agarwal Bail: महाराष्ट्र के पुणे में हुए हाई-प्रोफाइल 'कल्याणी नगर पोर्श क्रैश' मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को आरोपी नाबालिग के पिता और प्रसिद्ध बिल्डर विशाल अग्रवाल को नियमित जमानत दे दी है। करीब 22 महीनों की लंबी न्यायिक हिरासत के बाद अग्रवाल की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 19 मई 2024 की है, जब पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक लग्जरी पोर्श कार ने दो युवा आईटी प्रोफेशनल्स, अनीश आवधिया और अश्विनी कोष्ठा की मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोप था कि कार विशाल अग्रवाल का 17 वर्षीय नाबालिग बेटा चला रहा था, जो उस समय नशे की हालत में था।

साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप

विशाल अग्रवाल पर न केवल अपने नाबालिग बेटे को बिना लाइसेंस के महंगी कार देने का आरोप था, बल्कि उन पर हादसे के बाद सबूतों को मिटाने की साजिश रचने का भी गंभीर आरोप लगा। पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि ससून अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मिलकर नाबालिग के ब्लड सैंपल बदले गए थे ताकि रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। इस 'ब्लड सैंपल स्वैपिंग' मामले में विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी शिवानी अग्रवाल सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए विशाल अग्रवाल को जमानत प्रदान की। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और जांच के महत्वपूर्ण चरण पूरे हो चुके हैं। इससे पहले इसी मामले में अन्य सह-आरोपियों और नाबालिग की माँ को भी राहत मिल चुकी है।

पुणे पुलिस के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस ने अग्रवाल की जमानत का कड़ा विरोध किया था। हालांकि, अब जमानत मिलने के बाद वे जल्द ही यरवदा जेल से बाहर आ सकेंगे। इस मामले ने पूरे देश में सड़क सुरक्षा और रसूखदार परिवारों के बच्चों द्वारा कानून के उल्लंघन पर एक नई बहस छेड़ दी थी।

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