पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो ) 
पुणे

Pune में कोरोना काल का ऑक्सीजन प्लांट बेकार, मनपा की लापरवाही उजागर

Pune Oxygen Plant: कोरोना महामारी में स्थापित पुणे मनपा का मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट आज मुरलीधर लायगुडे अस्पताल में उपेक्षा के कारण बंद पड़ा है। वहगांव के निवासी अवधूत देशमुख ने प्लांट को लेकर सवाल उठाए।

अपूर्वा नायक

Oxygen Plant In Pune: एक तरफ पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) आगामी चुनाव से पहले करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दिलाने में व्यस्त है, तो दूसरी तरफ कोरोना महामारी के दौरान लाखों की लागत से स्थापित एक महत्वपूर्ण मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट आज मनपा की घोर अनदेखी के कारण धूल फांक रहा है।

करोड़ों के प्रोजेक्ट्स रातोंरात पास करने वाली मनपा ने सिंहगढ़ रोड स्थित मुरलीधर लायगुडे अस्पताल में स्थापित इस प्लांट को उसके हाल पर छोड़ दिया है। यह उपेक्षा ऐसे समय में हो रही है, जब मनपा डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए कमला नेहरू अस्पताल में उनका वेतन ढाई लाख रुपये तक बढ़ा रही है।

सवाल यह उठता है कि मनपा नए प्रोजेक्ट्स को लेकर जितनी सक्रिय दिखती है, उतना उन प्रोजेक्ट्स के प्रति गंभीर क्यों नहीं है, जिन पर पहले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं? कई प्रोजेक्ट हैं, जो अपनी उपयोगिता खो रहे हैं। शहर के सिंहगढ़ रोड स्थित मुरलीधर लायगुडे अस्पताल में कोरोना काल के दौरान स्थापित 'मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट' वर्तमान में पूरी तरह से निर्षक्रय अवस्था में है।

अस्पताल में कर्मचारियों की भारी किल्लत

लाखों रुपये खर्च करके स्थापित की गई यह सुविधा आज मनपा प्रशासन की घोर उपेक्षा का प्रमाण बन गई है। प्लांट परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, उपकरणों में जंग लग चुका है, और टूटी हुई बाड़ प्रशासन की अनदेखी को दर्शा रही है।

यह हाल कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से अपनों को गंवाने वाले नागरिकों का उपहास कर रहा है। इस प्लांट के उपयोग, ऑडिट रिपोर्ट और चालू-बंद होने का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सिंहगढ़ रोड परिसर में राजाराम पुल से खड़कवासला के बीच यह मनपा का एकमात्र बड़ा अस्पताल है, जिस पर हजारों नागरिक इलाज के लिए निर्भर हैं। अस्पताल में जून 2016 से ओपीडी शुरू थी और 2022 से प्रसूति गृह (इंडोर) सेवाएं भी चालू हुई। हालांकि, यहां आज भी कर्मचारियों की भारी कमी है। क्षेत्र की जनसंख्या के अनुसार ओपीडी के लिए 6 नसों की आवश्यकता है, लेकिन अस्पताल में केवल 5 नसें ही उपलब्ध हैं।

ऑक्सीजन प्लाट भी वर्तमान में इसलिए कार्यरत नहीं है क्योंकि अंतरंग-बाहा रोगी विभाग (इंडोर-आउटडोर) पूरी तरह से सक्रिय नहीं है। लेकिन आवश्यक तकनीशियन, ऑपरेटर और मेडिकल टीम उपलब्ध होने पर प्लांट शुरू करने के लिए हम तैयार है। - हॉ। नीना बोराडे, स्वास्थ्य प्रमुख, पुणे मनपा

लोगों को निजीकरण का डर

इलाके में इस बात की भी चर्चा है कि अस्पताल की दूसरी मंजिल एक निजी संस्था को दिए जाने के कारण कहीं यह निजीकरण का रास्ता ती नहीं खोल रहा है। ऑक्सीजन प्लांट का निष्क्रय होना और शुल्क आधारित सेवाओं के बढ़ने की आशंका से नागरिकों में बेचैनी है। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में पड़ी हुई खाटे, गद्दे, लोहे के उपकरणों का मलबा और साफ-सफाई की कमी डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को न्योता दे रही है। वहगांव के निवासी अवधूत देशमुख ने प्लांट के संबंध में प्रवेश द्वार पर उचित सूचना पट्ट न लगाए जाने पर भी सवाल उठाया है।

मनपा प्रशासन का जवाब

इस संबंध में पुणे मनपा की स्वास्थ्य प्रमुख डॉ। नीना बोराडे ने सफाई देते हुए कहा, 'अन्य उपचार शुरू करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर और आवश्यक सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को असुविधा हो रही है। मैंने सामान्य प्रशासन को अतिरिक्त मानव संसाधन (मनुष्यबळ) भर्ती के लिए औपचारिक पत्र भेजा है। आवश्यक कर्मचारी मिलते ही कई बंद सुविधाओं को तुरंत शुरू किया जा सकेगा।"

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