पुणे मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे में आचार संहिता का असर, PMC की बैठकों पर संकट से विकास कार्य अटके

Pune PMC Development Works: स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनाव की आचार संहिता का असर अब पुणे मनपा के कामकाज पर दिखने लगा है। स्थायी समिति की बैठकों पर रोक से मानसून पूर्व तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।

अपूर्वा नायक

Pune PMC Development Works News: स्थानीय स्वराज्य संस्था के विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता का सीधा असर अब पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के कामकाज पर दिखाई देने लगा है।

स्थायी समिति, विशेष समितियों और आमसभा की बैठकों पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं, जिससे शहर के विकास कार्य प्रभावित होने की स्थिति बन गई है। अगले एक महीने चार दिन तक नियमित बैठकें न होने की संभावना के कारण करोड़ों रुपये के प्रस्ताव और नागरिक सुविधाओं से जुड़े निर्णय अटक सकते हैं।

विकास योजनाएं प्रभावित

आचार संहिता लागू होने के बाद मनपा प्रशासन ने स्थायी समिति की पूर्व निर्धारित बैठक स्थगित कर दी है, वहीं हाल ही में आयोजित आमसभा को भी बीच में ही रद्द करना पड़ा। इससे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने कामकाज को लेकर गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मनपा प्रशासन के अनुसार, महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम के तहत स्थायी समिति की बैठक सप्ताह में कम से कम एक बार होना अनिवार्य है। इन्हीं बैठकों में आर्थिक मंजूरी, सड़क मरम्मत, जल निकासी, स्वास्थ्य सेवा, पथ प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) और विकास परियोजनाओं से जुड़े अहम निर्णय लिए जाते हैं। लेकिन आचार संहिता के कारण इन फैसलों पर फिलहाल रोक लग गई है।

पंपिंग सिस्टम और सड़क मरम्मत के काम अभी अधूरे

सबसे अधिक चिंता मानसून पूर्व के कामों को लेकर जताई जा रही है। जून में बारिश शुरू होने की संभावना है, जबकि शहर के कई हिस्सों में नाला सफाई, जल निकासी व्यवस्था, पंपिग सिस्टम और सड़क मरम्मत के काम अभी अधूरे हैं। हर साल भारी बारिश में निचले इलाकों, सोसायटियों और नदी किनारे की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है।

ऐसे में समय पर निर्णय नहीं होने से नागरिकों की मुश्किलें बढ़ सकती है। इसके अलावा, जुलाई में संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की पालकी का पुणे में आगमन होना है। लाखों वारकरियों के स्वागत के लिए पालकी मार्गों की मरम्मत, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं की तैयारी करना आवश्यक है, लेकिन बैठकों पर लगी रोक से इन कामों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

नगर सचिव ने चुनाव प्रशासन से मांगा मार्गदर्शन

  • इसी पृष्ठभूमि में नगर सचिव योगिता भोसले ने चुनाव प्रशासन को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। पत्र में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग के 2016 के निर्देशों के अनुसार, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की नियमित बैठकें जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति से आयोजित की जा सकती हैं।
  • मनपा ने अत्यावश्यक और आपातकालीन विषयों पर निर्णय लेने की अनुमति देने की मांग की है। राजनीतिक हलकों में भी इस स्थिति को लेकर नाराजगी है। कई जनप्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के कारण नियमित नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों को पूरी तरह रोकना शहर के हित में नहीं है।
  • अब सभी की नजरें चुनाव प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। यदि जल्द ही स्पष्ट निर्देश नहीं मिले, तो पुणे शहर में विकास कार्यों की गति पूरी तरह धीमी पड़ने और मानसून पूर्व तैयारियां ठप होने की आशंका है।

बिहार छात्र आंदोलन में रौशन आनंद का बड़ा दावा, बोले- एकजुट हो जाओ, तभी खोलूंगा आयोग का ‘काला चिट्ठा’

ओडिशा के पास 24 क्रू मेंबर समेत समुद्र में डूबा जहाज, पारादीप बंदरगाह से 200 नॉटिकल मील दूर हादसा

इधर ब्रजेश पाठक प्रदर्शनकारियों से मिले, उधर अखिलेश यादव ने बताया आरक्षण खत्म करने की साजिश, मचा सियासी बवाल!

यह छात्रों की नहीं, पैसों की गूंज है! राहुल गांधी के कार्यक्रम पर BJP नेता का बड़ा दावा; फॉरेन फंडिंग का आरोप

बाबा रामदेव के आंदोलन पर बृजभूषण का बड़ा तंज, बोले- इस बार सलवार पहनकर मत भागना