Pune Municipal Corporation: पुणे शहर में बढ़ती बुनियादी सुविधाओं की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना पुणे के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं में पेड़ों की कटाई को लेकर होने वाले विरोध के बीच पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने विकास और पर्यावरण को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर दिया है।
पुणे श्रमिक पत्रकार संघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट का मतलब विकास को रोकना नहीं, बल्कि पर्यावरण को साथ लेकर विकास की दिशा तय करना है। इसके लिए प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर संवाद जरूरी है।
आयुक्त ने कहा कि कई बार विकास परियोजनाओं को लेकर प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद की कमी के कारण विवाद की स्थिति पैदा होती है। इस दूरी को कम करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना को लेकर अलग-अलग पक्षों के सुझावों को समझकर व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और शहर के विकास को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में देखने के बजाय दोनों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।
नवल किशोर राम ने गणेशखिंड रोड के सड़क विकास कार्य का उदाहरण देते हुए बताया कि शुरुआती योजना में करीब 550 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी। हालांकि, पर्यावरणविदों के साथ चर्चा और उनके सुझावों के बाद योजना में बदलाव किया गया और पेड़ों की संख्या घटकर करीब 36-37 रह गई।
आयुक्त के अनुसार, यह उदाहरण दिखाता है कि संवाद और वैकल्पिक योजना के माध्यम से विकास कार्यों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कात्रज-कोंढवा सड़क चौड़ीकरण परियोजना का भी उल्लेख किया। आयुक्त ने कहा कि शहर में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हर विकास परियोजना का विरोध करने के बजाय उसके पर्यावरणीय और नागरिक प्रभावों पर चर्चा कर समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
कार्यक्रम में आयुक्त ने प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करने में पत्रकारिता की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इससे विभिन्न पक्षों के बीच संवाद तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर तथ्यात्मक चर्चा को बढ़ावा मिलता है।
पुणे शहर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देना आने वाले समय की महत्वपूर्ण जरूरत होगी।