कैब की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

Pune Mumbai Cab Fare Hike: पुणे-मुंबई कैब सफर पर महंगाई की मार, अब जेब पर पड़ेगा ₹400 तक का अतिरिक्त बोझ

Cab Fare Increases: पुणे-मुंबई कैब किराया बढ़ा, ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण अब अर्टिगा का सफर ₹300-400 महंगा। जानें नई दरें, सीएनजी-पेट्रोल के दाम और यात्रियों पर इसका प्रभाव।

गोरक्ष पोफली

Pune Mumbai Cab Fare Hike: पुणे और मुंबई के बीच नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक चिंताजनक खबर है। सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही निरंतर वृद्धि के कारण अब इस मार्ग पर कैब का सफर काफी महंगा हो गया है। जिला प्रशासन और कैब ऑपरेटरों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, ईंधन की बढ़ती लागत का सीधा बोझ अब यात्रियों की जेब पर डाला जा रहा है, जिससे प्रति यात्रा किराये में 300 रुपये से 400 रुपये तक की भारी वृद्धि देखी जा रही है।

किराये में वृद्धि का विवरण और वर्तमान दरें

स्रोत के अनुसार, यह नई दरें मई के अंतिम सप्ताह से प्रभावी हो गई हैं। किराये में हुए बदलाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मारुति अर्टिगा जैसी गाड़ियों का एकतरफा किराया, जो पहले 3,500 रुपये था, वह अब टोल शुल्क के साथ बढ़कर 3,800 रुपये हो गया है। इसी तरह, प्रति किलोमीटर की दर को भी 19 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये कर दिया गया है। इस समय बाजार में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर हैं, जहाँ सीएनजी 96.50 रुपये प्रति किलोग्राम, डीजल 98.68 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 112.04 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।

कैब चालकों की विवशता और यात्रियों की प्रतिक्रिया

कैब चालकों, जैसे विजय यादव और प्रसाद शेलके का कहना है कि मई महीने में ईंधन की कीमतों में तीन बार वृद्धि हुई, जिसके बाद उनके लिए पुरानी दरों पर सेवाएं देना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया था। हालांकि, किराये में इस अचानक वृद्धि का यात्रियों द्वारा विरोध भी किया जा रहा है। चालकों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत यात्री मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए यात्रा करते हैं। जहाँ नियमित ग्राहक स्थिति की गंभीरता को समझ रहे हैं, वहीं नए यात्रियों के साथ किराए को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति बन रही है।

बजट पर असर और बदलता रुझान

इस मूल्य वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव कॉर्पोरेट कर्मचारियों, विद्यार्थियों और उन यात्रियों पर पड़ा है जो पेशेवर कारणों से इन दो शहरों के बीच नियमित आवाजाही करते हैं। उनका मासिक यात्रा बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। बढ़ते खर्चों के कारण अब कई लोग निजी कैब की बजाय बस और रेल यात्रा को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे निजी परिवहन क्षेत्र पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।

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