पुणे शिक्षक विधान परिषद सीट पर्चा दाखिल (सोर्स: नवभारत)
पुणे

पुणे स्नातक-शिक्षक सीट पर सस्पेंस बरकरार! चुनावी बिगुल बजते ही बढ़ी हलचल, सस्पेंस के बीच पहला पर्चा दाखिल

Pune Graduate Seat Suspense: पुणे स्नातक और शिक्षक विधान परिषद सीट के लिए चुनावी बिगुल बजते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रमुख दलों में सस्पेंस के बीच निर्दलीय पर्चा दाखिल हुआ है।

गोरक्ष पोफली

Pune Graduate Constituency Nominations: पुणे स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नामांकन पत्र लेने के लिए इच्छुकों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में एक तरफ चुनाव मैदान में उतरने के लिए दावेदार सक्रिय हैं, तो दूसरी तरफ सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 36 लोगों ने 61 नामांकन पत्र, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 19 लोगों ने 36 नामांकन पत्र लिए। यानी दोनों सीटों के लिए कुल 55 लोगों ने 97 नामांकन पत्र लिए हैं। इससे चुनाव लड़ने के इच्छुकों की बड़ी संख्या सामने आई है।

हालांकि, अभी तक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से तानाजी नाईक ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पहले दिन एक भी नामांकन दाखिल नहीं हुआ।

शनिवार को भी जमा होंगे नामांकन

नामांकन प्रक्रिया के बीच शनिवार को प्रशासनिक अवकाश होने के बावजूद नामांकन पत्र स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय आयुक्त शीतल तेली ने इसकी जानकारी दी है। इससे आगामी दिनों में नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

भाजपा के उम्मीदवारों पर टिकी नजर

इस चुनाव में सबसे अधिक उत्सुकता भाजपा के उम्मीदवारों को लेकर है। भाजपा की ओर से दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के नाम जल्द घोषित किए जाने की संभावना है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर कई नामों की चर्चा चल रही है। दूसरी ओर महायुति के घटक दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से भी कुछ सीटों पर दावेदारी की चर्चा है।

ऐसे में उम्मीदवार चयन के साथ ही सीटों को लेकर महायुति के भीतर का राजनीतिक गणित भी महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा यदि दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी करती है, तो सहयोगी दलों की दावेदारी का क्या होगा, इस पर भी राजनीतिक नजरें लगी हैं। आधिकारिक घोषणा होने तक इच्छुक उम्मीदवारों की सक्रियता और पार्टी स्तर पर होने वाली बैठकों पर सभी की नजर रहेगी।

2020 के बाद पूरी तरह बदला राजनीतिक परिदृश्य

2020 के विधान परिषद चुनाव में पुणे स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों पर महाविकास आघाडी के उम्मीदवार विजयी हुए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस में विभाजन हुआ और राज्य में महायुति की सरकार बनी।

अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों सीटों का चुनाव हो रहा है। यही वजह है कि इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर राजनीतिक दलों में काफी सतर्कता दिखाई दे रही है। पार्टी का अधिकृत चेहरा सामने आने के बाद ही चुनावी मुकाबले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी। फिलहाल पुणे में इच्छुकों की भीड़, पार्टियों में मंथन और उम्मीदवारों के नाम पर सस्पेंस बरकरार है। इन तीनों के बीच विधान परिषद चुनाव का माहौल गर्माने लगा है। अगले कुछ दिनों में प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलने की संभावना है।

‘गड़बड़ी’ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षक

पुणे विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से पहले मतदाता पंजीकरण को लेकर विवाद गहरा गया है। 23 अक्टूबर को मतदान होना है, लेकिन हजारों पात्र शिक्षक और प्राध्यापक मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं, ऐसा आरोप लगाते हुए शिक्षकों ने अब सीधे मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मतदाता पंजीकरण के लिए तत्काल समय बढ़ाने की मांग की गई है।

शिंदे गुट की शिवसेना के इच्छुक उम्मीदवार प्रो।सचिन सानप ने पुणे में पत्रकार परिषद में यह जानकारी दी। सानप ने आरोप लगाया कि चुनाव कार्यक्रम 22 सितंबर को घोषित किया गया और महज चार दिन बाद, 26 सितंबर को मतदाता पंजीकरण बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, 26 सितंबर शनिवार और सरकारी अवकाश था। ऐसे में शिक्षकों को पंजीकरण के लिए व्यावहारिक रूप से केवल एक-दो दिन ही मिले। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक पंजीकरण से वंचित रह गए।

32 हजार से घटकर 12 हजार मतदाता!

सानप ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2020 के चुनाव में पुणे जिले में 32,201 शिक्षक मतदाता थे। जनवरी 2026 में तैयार नई सूची में यह संख्या घटकर 12,187 रह गई। सोलापुर, कोल्हापुर, सातारा और सांगली जिलों में भी इसी तरह की स्थिति होने का दावा उन्होंने किया।

सानप के अनुसार, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद शिक्षकों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। अब अदालत के रुख पर नजर है। चुनावी तैयारी के बीच मतदाता सूची का यह विवाद प्रशासन और चुनाव आयोग के लिए नई चुनौती बन गया है।

नवभारत लाइव के लिये समीर सैय्यद की रिपोर्ट

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