Pune Khanapur Village Garbage Crisis PMC: सिंहगढ़ क्षेत्र का खानापुर गांव इन दिनों कचरे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव की मुख्य सड़कों, अंदरूनी गलियों और नदी-नालों में जगह जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं।
बारिश और बहते गंदे पानी के कारण कचरा सड़ने से क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। वहीं, मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ने से बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
करीब 7 हजार की आबादी वाला खानापुर पुणे-पानशेत मार्ग का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहां राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंक, बिजली कार्यालय, मंडल राजस्व कार्यालय, परिमंडल वन कार्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं।
इसके चलते स्थानीय ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों की रोजाना बड़ी संख्या में आवाजाही होती है।
ग्राम पंचायत पहले गांव से कचरा एकत्र कर उसे पुणे महानगरपालिका के डंपिंग यार्ड में भेजती थी। हालांकि, मनपा द्वारा खानापुर का कचरा लेने से मना किए जाने के बाद से कचरा गांव में ही जमा होने लगा है।
निस्तारण का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने से स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इस समस्या को लेकर पहले राज्य विधानमंडल में भी आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
खडकवासला विधानसभा भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष शरद जावलकर ने बताया कि ग्राम पंचायत की कचरा गाड़ियां कई दिनों से बंद पड़ी हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगने से बच्चों और बुजुगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से रोजाना कचरा उठाने और गीले-सूखे कचरे का अलग-अलग प्रसंस्करण करने की मांग की है।
गांव में बढ़ती आबादी और आवाजाही के कारण प्रतिदिन करीब एक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसमे प्लास्टिक और अन्य अजैविक कचरे की मात्रा अधिक है। ग्राम पंचायत के पास कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए गावरान अथवा सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने से कचरे के निस्तारण की समस्या बनी हुई है।
गांव में कचरा प्रसंस्करण प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं है, इसलिए हम एकत्रित कचरा महानगरपालिका को देते थे। अब पालिका ने कचरा लेना बंद कर दिया है। हमने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से तुरंत समाधान की मांग की है।शिल्पा गायकवाड़, सरपंच, खानापुर