Pune Illegal Construction Gunthewari Regularisation: पुणे मनपा में अवैध निर्माणों के नियमितीकरण के लिए गुंठेवारी योजना के तहत करीब 1,100 प्रस्ताव आए हैं। इनमें सिर्फ 40 को मंजूरी मिली, जबकि 700 से 750 प्रस्ताव खारिज हो चुके हैं। महंगा शुल्क, दस्तावेजों की जटिलता और रक्षा विभाग की अनुमति जैसी अड़चनें नागरिकों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
पुणे में अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए शुरू की गई गुंठेवारी योजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। पुणे मनपा के गुंठेवारी कक्ष में अब तक करीब 1,100 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से सिर्फ 40 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, जबकि करीब 700 से 750 प्रस्ताव खारिज किए जा चुके हैं। बाकी प्रस्ताव माप, दस्तावेज और तकनीकी जांच की प्रक्रिया में अटके हुए हैं।
मंजूरी की तुलना में बड़ी संख्या में प्रस्ताव खारिज होने से योजना की प्रक्रिया और पात्रता को लेकर नागरिकों के सामने कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए फिलहाल करीब 500 से 550 रुपए प्रति वर्ग मीटर शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा दस्तावेज तैयार करने, भूखंड की माप कराने और अन्य प्रक्रियाओं का खर्च भी नागरिकों को उठाना पड़ता है। छोटे भूखंड और सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह कुल खर्च बड़ी बाधा बन रहा है।
नागरिक लंबे समय से शुल्क में राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमितीकरण का अवसर उपलब्ध होने के बावजूद अधिक शुल्क के कारण सामान्य परिवार आवेदन करने से पहले कई बार सोचते हैं।
योजना के तहत 31 दिसंबर 2020 से पहले अस्तित्व में आए निर्माण पात्र माने जाते हैं। इसके लिए निर्माण पुराना होने का प्रमाण, भूखंड से संबंधित दस्तावेज, माप और अन्य जरूरी कागजात प्रस्तुत करने होते हैं।
दस्तावेज अधूरे होने या निर्धारित नियमों के अनुसार पात्रता पूरी नहीं करने पर प्रस्ताव खारिज हो सकते हैं। यही वजह है कि दस्तावेज जुटाना भी आवेदकों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रक्षा विभाग की सीमा में आने वाले निर्माणों के लिए प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। ऐसे मामलों में रक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC की जरूरत पड़ सकती है। प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।
कई नागरिकों में यह धारणा है कि वर्षों से संपत्ति कर भरने से निर्माण वैध हो जाता है। हालांकि, संपत्ति कर की वसूली किसी अनधिकृत निर्माण को कानूनी मान्यता नहीं देती। निर्माण को वैध कराने के लिए अलग से नियमितीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होती है और निर्धारित शुल्क व विकास शुल्क का भुगतान करना पड़ता है।
नियमितीकरण के बाद भी निर्माण की संभावनाएं सड़क की चौड़ाई और लागू विकास नियमों पर निर्भर रहेंगी। छह और नौ मीटर सड़क से जुड़े नियम भी निर्माण क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।