Pune Graduates MLC Seat NCP BJP Alliance Seat Sharing Dispute: महाराष्ट्र में पुणे ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट भाजपा के खाते में जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है।
प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने भी इस फैसले पर असंतोष जताया है। दोनों नेताओं के बयानों से पार्टी के नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रफुल पटेल ने कहा कि पुणे ग्रेजुएट्स सीट भाजपा को दिए जाने का फैसला पुणे सहित पांच जिलों में पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर करने वाला है। उन्होंने याद दिलाया कि यह निर्वाचन क्षेत्र राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मजबूत आधार रहा है और पिछले चुनाव में पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न पर यहां जीत हासिल की थी।
पटेल के मुताबिक, जिस सीट पर पार्टी पहले चुनाव लड़ चुकी है और जीत दर्ज कर चुकी है, वहां अब भाजपा का उम्मीदवार मैदान में उतरेगा। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा होना स्वाभाविक है।
इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पुणे ग्रेजुएट्स सीट नहीं मिलने को पार्टी नेतृत्व की सामूहिक नाकामी बताया था। अब पटेल की टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर असहमति और अधिक चर्चा में आ गई है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं के बयानों को पार्टी के नेतृत्व और सीट बंटवारे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन टिप्पणियों को सीधे पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व के खिलाफ औपचारिक चुनौती मानने से पहले व्यापक राजनीतिक संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है।
प्रफुल पटेल ने बताया कि पुणे ग्रेजुएट्स सीट भाजपा को देने का निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच हुई बैठक में लिया गया था। इस फैसले के बाद अब पार्टी के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि पुणे ग्रेजुएट्स सीट छोड़ने को पार्टी की नाकामी नहीं माना जाना चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद महाराष्ट्र की गठबंधन राजनीति में अहम मुद्दा बन सकता है।