पुणे सरकारी जमीन कार्रवाई (सोर्सः सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे में सरकारी जमीनों का दुरुपयोग, 30 से 40 जमीनें सरकार ने ली अपने कब्जे में, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई

Pune Land Rule Violation: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ समेत जिले में सरकारी लीज और कब्जे पर दी गई 112 जमीनों में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई है। 30 से 40 जमीनें सरकार ने अपने कब्जे में ले ली हैं।

आंचल लोखंडे

Government Land Seized Pune: पुणे जिले में सरकारी जमीनों के दुरुपयोग की बात सामने आई है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ समेत जिले में राज्य सरकार द्वारा कब्जे या लीज पर दी गई 112 जमीनों में नियमों का उल्लंघन किया गया है। इनमें से करीब 350 करोड़ रुपए की 30 से 40 जमीनों को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में लेकर सरकार के पास जमा कर दी है। इनमें सबसे ज्यादा जमीनें पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ शहरों की हैं।

जमीन वर्ग 1और वर्ग 2 इस प्रकार की है। जिसमें वर्ग 2 की ज़मीन में मंदिर की ज़मीन, प्रोजेक्ट से प्रभावित ज़मीन, हेरिटेज ज़मीन, रिहैबिलिटेशन की ज़मीन, सीलिंग की ज़मीन, आदीवासियों की ज़मीन, और सरकार द्वारा दी गई या लीज़ पर दी गई दूसरी सभी ज़मीनें शामिल हैं। ये ज़मीनें सरकार कुछ शर्तों पर देती है। अगर इन्हें बेचना, खरीदना या इस्तेमाल में बदलाव करना है, तो सरकार से इजाज़त लेनी होगी।

इन कारनों से सरकार ने वापस ली जमीन

राज्य सरकार ने पुनर्वास और आदिवासी ज़मीन बेचने की इजाज़त देने का अधिकार तहसीलदारों को, आदिवासी और मंदिर की ज़मीन बेचने का अधिकार सरकार को, और सरकारी ज़मीन बेचने का अधिकार डिविजनल कमिश्नरों और ज़िला कलेक्टरों को दिया है, यह ज़मीन के टाइप पर निर्भर करता है। इसलिए, अगर वर्ग 2 की ज़मीन बेचते या खरीदते समय इजाज़त नहीं ली जाती है, और अगर ज़मीन का इस्तेमाल उन वजहों के लिए नहीं किया जाता है जिनके लिए उसे दिया गया था, या अगर उसका इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया जाता है, तो यह शर्त का उल्लंघन है और ज़मीन सरकार को वापस कर दी जाती है।

कुल 330 मामलों का खुलासा

मुंढवा में बॉटनिकल गार्डन की ज़मीन, बोपोडी में कृषी विभाग की ज़मीन और तथावड़े में एनिमल हस्बैंड्री डिपार्टमेंट की ज़मीन पर गड़बड़ी के 330 मामले सामने आए थे। इसके बाद ज़िला प्रशासन की नींद खुली। ज़िला कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने इस बारे में ऐसी सभी ज़मीनों का इंस्पेक्शन करके रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। इसके मुताबिक, प्रशासन की तरफ से किए गए इंस्पेक्शन में शर्तों के उल्लंघन के 330 मामले सामने आए। इनमें से 112 ज़मीनों पर कार्रवाई की गई है।

कुछ मामलों में लगाया गया जुर्माना

इनमें से 30 से 40 ज़मीनें सरकार को सौंप दी गई हैं। कुछ मामलों में जुर्माना लगाया गया है। कुछ मामलों में कहा गया कि सरकार के पास अधिकार होने के कारण मामले सरकार को ट्रांसफर कर दिए गए। पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और जिले में राज्य सरकार द्वारा लीज़ और कब्ज़े पर दी गई ज़मीनों की संख्या लगभग दो हज़ार है। इनमें कई राजनीतिक हस्तियों से जुड़े संगठन और कुछ बड़े एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन भी शामिल हैं।

कार्रवाई कर ज़ब्त की गई ज़मीनों में पुणे शहर में 14, पिंपरी-चिंचवड़ शहर में दो और ज़िलेभर में से 14 ज़मीनें शामिल हैं। प्रशासन ने बताया कि बाकी ज़मीनें पुणे ज़िले में हैं। ज़मीन जिस मकसद के लिए दी गई थी, उसके लिए इस्तेमाल नहीं हुई। लीज़ का समय खत्म होने के बाद भी उसे बढ़ाया नहीं गया। सरकार के कब्ज़े में लेने के बाद भी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं हुआ। ज़मीन जिस उपयोग के लिए दी गई थी, लेकिन उसका इस्तेमाल दूसरी चीज़ों के लिए किया गया।

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