PMPML Financial Crisis Pune PMC Special General Body Meeting: पुणे महानगरपालिका की विशेष आम सभा में पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (पीएमपीएमएल) की बढ़ती आर्थिक बदहाली, लचर प्रशासन और यात्रियों को मिल रही निम्न स्तरीय सेवाओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नगरसेवकों ने प्रबंधन को जमकर घेरा। बैठक के दौरान महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रबंध निदेशक को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि पीएमपीएमएल किसी के घर की निजी संस्था नहीं, बल्कि पुणेकरों की सार्वजनिक संपत्ति है।
जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जायज सवालों को हस्तक्षेप मानने की मानसिकता से प्रशासन को तुरंत बाहर आना होगा। महापौर नागपुरे ने सदन में कहा कि नगरसेवकों ने स्वयं बस डिपो का दौरा किया है, बसों में सफर कर जमीनी हकीकत को परखा है तथा यात्रियों व कर्मचारियों की परेशानियों को प्रत्यक्ष रूप से समझा है। इसलिए, प्रशासन को उनकी शिकायतों और सुझावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने सीएमडी को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सदन के समक्ष एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण पेश करें और उठाए गए हर सवाल का स्पष्ट जवाब दें। सदन के नेता गणेश बिडकर ने भी प्रशासन पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पुणे मनपा पीएमपीएमएल में 60 प्रतिशत की हिस्सेदार है और ऐसी स्थिति में सदन ही इस संस्था का सर्वोच्च मालिक है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर मनमाना प्रशासन चलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिडकर ने नई बसों की खरीद से पहले डिपो, पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन, चालक-परिचालकों की भर्ती और एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की सख्त मांग उठाई। कर्मचारियों के लंबित वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं, 20 से 25 निविदाओं में कथित अनियमितताओं की जांच तथा मेट्रो स्टेशनों को फीडर बस सेवा से जोड़ने की
आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेष आम सभा के दौरान पीएमपीएमएल को आर्थिक अनुदान देने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने गंभीर आरोप लगाए कि यह संस्था आम यात्रियों की तुलना में ठेकेदारों के व्यावसायिक हितों को साधने का जरिया बनती जा रही है।
पूर्व महापौर प्रशांत जगताप और नगरसेवक सुनील शिंदे ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि नियमों के अनुसार कुल बेड़े में ठेका बसों की संख्या 25 प्रतिशत तक होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह बढ़कर 50 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है। उन्होंने इस पर प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की।
इस दौरान पुणे शहर के बस स्टैंडों की जर्जर स्थिति और यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव और लगातार बढ़ता वित्तीय घाटा और संपत्तियों के किराए का पारदर्शी हिसाब न होना के साथ अनुकंपा नियुक्तियों में जानबूझकर की जा रही देरी के मुद्दे भी उठाए गए।
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PMPML के एमडी महेश आव्हाड ने महामंडल के कामकाज पर सफाई देते हुए कहा कि सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि बेहतर सेवा देना है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में आय 120 प्रतिशत बढ़कर 818 करोड़ रुपये हो गई है, हालांकि सीएनजी, बिजली और वेतन बढ़ने से खर्च 1,610 करोड़ तक पहुंच गया है। वर्तमान में 1,964 बसों का बेड़ा है और जल्द ही 2,000 नई बसें शामिल की जाएंगी। आव्हाड ने दावा किया कि प्रति किलोमीटर आय बढ़कर 55.86 रुपये हो गई है और दुर्घटना दर में भी भारी कमी आई है।
बैठक में पदोन्नति में कथित अनियमितताएं, पुरानी बैटरियों की बिक्री और बसों के रख-रखाव में अनदेखी पर भी सवाल दागे गए। इस उच्चस्तरीय बैठक में हाजी गफूर पठान, अश्विनी भंडारे, प्रसनजीत वैरागे, अश्विनी लाडगे, राकेश कामठे, सुरेंद्र पठारे, मारुति तुपे, दीपाली ढोक, मृणाल कांबले, विशाल भेलके, स्वप्नील दुधाणे, सायली वांजळे, सुमय्या नदाफ और सूरज लोखंडे समेत कई अन्य नगरसेवकों ने भी पीएमपीएमएल के लचर प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज पर तीखे सवाल दागे।