PMC General Body Meeting Pune Ruckus: पुणे महानगर पालिका की मंगलवार को आयोजित आम सभा में प्रशासनिक अव्यवस्था, अधिकारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) में देरी और बाहरी अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष ने एकजुट होकर मनपा को कटघरे में खड़ा किया। नगरसेवकों का आरोप है कि मनपा कैडर के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को दरकिनार कर बाहर से आने वाले अफसरों को तरजीह दी जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर गहरा असंतोष व्याप्त है।
हंगामे को देखते हुए मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा कि प्रमोटेड पदों की कानूनी अड़चनों को दूर किया जा रहा है और अतिरिक्त आयुक्त पद के लिए तीन पात्र अधिकारियों का प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर नगर विकास विभाग को भेज दिया जाएगा।
सभा के दौरान नगरसेवकों ने मनपा में पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया न होने पर गंभीर सवाल खड़े किए। नियमों के अनुसार निकाय में 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से और शेष 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरे जाने चाहिए।
भाजपा के नगरसेवक पृथ्वीराज सुतार ने वर्ष 2014 के स्वीकृत ढांचे का हवाला देते हुए मांग की कि मनपा के मूल कैडर के अधिकारियों को ही अतिरिक्त आयुक्त व समकक्ष पदों पर अवसर दिया जाना चाहिए।
महेश वाबले ने प्रशासनिक असमानता उजागर करते हुए कहा कि मनपा के स्थानीय अफसरों को केवल 6 महीने की अस्थायी पदोन्नति दी जाती है, जबकि बाहर से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी वर्षों तक जमे रहते हैं। इसी तरह नगरसेविका अनिता कदम ने सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पद के लिए निकाले गए 'वॉक-इन-इंटरव्यू' के विज्ञापन पर सवाल उठाए। साथ ही, विधि अधिकारी निलेश बडगुजर की पदोन्नति रोके जाने पर नाराजगी जताई।
सदन में उस वक्त अचानक माहौल गरमा गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नगरसेवक अमोल बालवडकर ने एक उपरोधात्मक प्रस्ताव पेश किया।
उन्होंने मांग रखी कि सदन के प्रत्येक नगरसेवक के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान पर कम से कम 10 मिनट बोलना अनिवार्य किया जाए।
भाजपा नगरसेवकों को जब यह अहसास हुआ कि यह उन पर राजनीतिक तंज कसा गया है, तो उन्होंने हंगामा करते हुए माफी की मांग की।
हालांकि, स्थिति तब असहज हो गई, जब कोई भी भाजपा नगरसेवक 10 मिनट बोलने की चुनौती स्वीकार करने आगे नहीं आया। बाद में, विरोधी पक्ष के नेता नीलेश निकम ने राजनीतिक संदेश देने के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया, जिसके बाद सदन शांत हुआ।
प्रशासनिक लचर व्यवस्था का आलम तब देखने को मिला, जब बोलने के दौरान सत्ताधारी दल की नगरसेविका स्वरदा बापट और अर्चना पाटिल का माइक अचानक बंद हो गया। इस पर स्वरदा बापट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की, वहीं अर्चना पाटिल ने तंज कसते हुए कहा, 'जब बोलने ही नहीं दिया जा रहा, तो पहली पंक्त्ति में बैठने का क्या औचित्य है?'
मनपा आयुक्त पुणे नवल किशोर राम ने बाताया की 2014 के स्वीकृत ढांचे के अनुसार मनपा के विभिन्न विभागों में रिक्त हैं। इस वर्ष 30 विभागों के भर्ती नियमों और रोस्टर को अद्यतन कर सरकार को भेजा जा रहा है। समाविष्ट गांवों के कर्मचारियों की रिपोर्ट अगले सप्ताह सौंपी जाएगी। वहीं, विधि अधिकारी के मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र आदेश जारी किए जाएंगे।