Pimpri Pavana Closed Pipeline Project: पिंपरी-चिंचवड़ शहर की बढ़ती प्यास बुझाने के लिए तैयार की गई महत्वाकांक्षी पवना बंद जलवाहिनी परियोजना पिछले 15 वर्षों से राजनीतिक दांवपेंच, प्रशासनिक सुस्ती और ग्रामीण विरोध के कारण अधर में लटकी हुई है।
ढाई साल पहले राज्य सरकार ने इस परियोजना से प्रतिबंध हटाया था, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। हाल ही में स्थानीय सांसद द्वारा मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। शहरवासियों के बीच अब यह सवाल तेज हो गया है कि आखिर इतने वर्षों में जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर जलसंकट को हल करने के लिए ठोस प्रयास क्यों नहीं किए।
साल 2008 में पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका ने पवना बांध से सीधे बंद भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजना बनाई थी। लगभग 35 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन का उद्देश्य खुले नदीपात्र से होने वाले रिसाव, पानी की चोरी, प्रदूषण और वाष्पीकरण को रोकना था। उस समय देश की प्रतिष्ठित कंपनी एल एंड टी को परियोजना का ठेका दिया गया था और इसकी लागत 388 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन वर्षों तक काम बंद रहने और प्रशासनिक ढिलाई के कारण आज यही लागत बढ़कर 1075 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। इसे सीधे तौर पर टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी माना जा रहा है।
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करीब 12 वर्षों तक बंद रहने के बाद दिसंबर 2023 में राज्य सरकार ने प्रतिबंध हटाया, हालांकि, आज भी परियोजना फाइलों में अटकी हुई है। प्रशासन का दावा है कि नए डीपीआर में किसानों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक पवना और इंद्रायणी नदी में आवश्यक जलप्रवाह बनाए रखा जाएगा ताकि ग्रामीण इलाकों को नुकसान न हो। साथ ही अमृत योजना और राज्य सरकार से विशेष फंडिंग के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मंजूरी मिलते ही पुराने ठेके को रद्द कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।