पावना पाइपलाइन प्रोजेक्ट में देरी (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

पिंपरी-चिंचवड़ की जल संकट योजना फंसी राजनीति और विरोध में, 388 करोड़ की परियोजना पहुंची 1075 करोड़ पर

Pimpri Pavana Closed: पिंपरी-चिंचवड़ की पवना बंद जलवाहिनी परियोजना 15 वर्षों से राजनीतिक विवाद, ग्रामीण विरोध और प्रशासनिक सुस्ती के कारण अटकी हुई है। परियोजना की लागत अब तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है।

अपूर्वा नायक

Pimpri Pavana Closed Pipeline Project: पिंपरी-चिंचवड़ शहर की बढ़ती प्यास बुझाने के लिए तैयार की गई महत्वाकांक्षी पवना बंद जलवाहिनी परियोजना पिछले 15 वर्षों से राजनीतिक दांवपेंच, प्रशासनिक सुस्ती और ग्रामीण विरोध के कारण अधर में लटकी हुई है।

ढाई साल पहले राज्य सरकार ने इस परियोजना से प्रतिबंध हटाया था, लेकिन इसके बावजूद जमीन पर काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। हाल ही में स्थानीय सांसद द्वारा मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। शहरवासियों के बीच अब यह सवाल तेज हो गया है कि आखिर इतने वर्षों में जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर जलसंकट को हल करने के लिए ठोस प्रयास क्यों नहीं किए।

प्रशासन के ढुलमुल रवैये से टैक्सपेयर्स के पैसों की हो रही बर्बादी

साल 2008 में पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका ने पवना बांध से सीधे बंद भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजना बनाई थी। लगभग 35 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन का उद्देश्य खुले नदीपात्र से होने वाले रिसाव, पानी की चोरी, प्रदूषण और वाष्पीकरण को रोकना था। उस समय देश की प्रतिष्ठित कंपनी एल एंड टी को परियोजना का ठेका दिया गया था और इसकी लागत 388 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन वर्षों तक काम बंद रहने और प्रशासनिक ढिलाई के कारण आज यही लागत बढ़कर 1075 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। इसे सीधे तौर पर टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी माना जा रहा है।

पुलिस गोलीबारी में हुई थी किसानों की मौत

  • शुरुआती चरण में शहर क्षेत्र के भीतर करीब 4.40 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा भी कर लिया गया था, लेकिन जैसे ही काम मावल क्षेत्र की ओर बढ़ा, किसानों ने तीव्र विरोध शुरू कर दिया।
  • ग्रामीणों का कहना था कि यदि बांध का पानी सीधे पाइपलाइन से शहर भेज दिया गया तो पवना नदी, कालेवाड़ी नदीपात्र, स्थानीय कोल्हापुरी बंधारे, कृषि कुएं और भूजल स्तर पूरी तरह प्रभावित हो जाएंगे। विरोध इतना उग्र हुआ कि 9 अगस्त 2011 को पुलिस गोलीबारी में किसानों की मौत हो गई। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने परियोजना पर रोक लगा दी थी।

2023 में सरकार ने प्रतिबंध हटाया

करीब 12 वर्षों तक बंद रहने के बाद दिसंबर 2023 में राज्य सरकार ने प्रतिबंध हटाया, हालांकि, आज भी परियोजना फाइलों में अटकी हुई है। प्रशासन का दावा है कि नए डीपीआर में किसानों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक पवना और इंद्रायणी नदी में आवश्यक जलप्रवाह बनाए रखा जाएगा ताकि ग्रामीण इलाकों को नुकसान न हो। साथ ही अमृत योजना और राज्य सरकार से विशेष फंडिंग के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मंजूरी मिलते ही पुराने ठेके को रद्द कर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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