पिंपरी चिंचवड़ वृक्ष गणना (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पिंपरी-चिंचवड़ में पेड़ों का डेटा ऐप-वेबसाइट से नदारद, अब नए सिरे से सर्वे की तैयारी

Pimpri Chinchwad Tree Survey Tender: पिंपरी-चिंचवड़ में फिर होगी पेड़ों की गिनती! 6.76 करोड़ के पुराने GIS सर्वे के अधूरे रहते नए टेंडर पर उठे सवाल, 9 सितंबर तक आवेदन मांगे।

वेदांत जोशी

Pimpri Chinchwad Tree Authority Meeting On Old Agency Penalty: पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के उद्यान विभाग की वृक्ष गणना को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कार्यकाल में GIS आधारित वृक्ष गणना का काम अधूरा रहने के बावजूद अब नई तकनीक से शहर के पेड़ों की गणना कराने के लिए नया टेंडर आमंत्रित किया गया है।

इस फैसले को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि पुराने प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं करने वाली एजेंसी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई और नए सर्वे की जरूरत क्यों पड़ी।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। मनपा का कहना है कि नियमानुसार हर पांच वर्ष में वृक्ष गणना कराना जरूरी है और शहर में पेड़ों का अद्यतन डेटा तैयार करने के लिए नया सर्वे आवश्यक है।

2018 में 6.76 करोड़ में हुई थी GIS गणना

महाराष्ट्र नगरीय क्षेत्र वृक्ष संरक्षण नियमावली के तहत हर पांच वर्ष में शहर के पेड़ों की गणना करना अनिवार्य बताया गया है।

वर्ष 2017-18 में तत्कालीन आयुक्त श्रावण हर्डीकर के कार्यकाल में सैटेलाइट और GPS तकनीक के जरिए वृक्ष गणना का काम मुंबई की मेसर्स टेर्राकॉन इकोटेक को करीब 6.76 करोड़ रुपये में दिया गया था।

इस एजेंसी ने शहर में कुल 32,16,799 पेड़ होने का दावा किया था। हालांकि, परियोजना के तहत मोबाइल ऐप विकसित करने, वेबसाइट पर पेड़ों की तस्वीरें अपडेट करने और अवैध कटाई रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित करने जैसे कार्य पूरे नहीं होने की बात सामने आई है।

1.69 करोड़ रुपये रोके, लेकिन कार्रवाई का सवाल

अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी काम अधूरा रहने के कारण मनपा ने संबंधित एजेंसी के करीब 1.69 करोड़ रुपये रोक दिए और उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

लेकिन आरोप है कि सात-आठ वर्ष बीतने के बाद भी संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया और न ही जुर्माना लगाया गया। इसी को लेकर नए टेंडर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

मनपा के अनुसार, पुराने प्रोजेक्ट के अधूरे कार्य पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।

2003 से 2018 तक ऐसे बदली वृक्ष गणना

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2003-04 में मैनुअल वृक्ष गणना पर 39 लाख रुपये खर्च हुए थे। उस समय प्रति पेड़ गणना की दर 2.35 रुपये थी। वर्ष 2007 में शहर में 18.93 लाख पेड़ दर्ज किए गए थे।

इसके बाद वर्ष 2018 में सैटेलाइट/GIS आधारित गणना कराई गई। इस पर करीब 6.76 करोड़ रुपये खर्च हुए और कुल 32,16,799 पेड़ दर्ज किए गए। इस गणना की दर करीब 10 रुपये प्रति पेड़ बताई गई है।

2018 में प्रभागवार दर्ज पेड़

2018 की गणना के अनुसार अलग-अलग प्रभागों में पेड़ों की संख्या इस प्रकार दर्ज की गई थी:

  • ‘अ’ प्रभाग: 3,06,094

  • ‘ब’ प्रभाग: 4,62,137

  • ‘क’ प्रभाग: 3,51,173

  • ‘ड’ प्रभाग: 5,12,368

  • ‘ई’ प्रभाग: 8,43,824

  • ‘फ’ प्रभाग: 7,41,203

इन आंकड़ों में ‘ई’ प्रभाग में सबसे अधिक 8,43,824 पेड़ दर्ज किए गए थे।

9 सितंबर तक आवेदन

पुराने सर्वे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मनपा ने नई वृक्ष गणना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 9 सितंबर तय की गई है।

मुख्य उद्यान अधीक्षक महेश गारगोटे ने कहा कि नियमों के अनुसार वृक्ष गणना कराना अनिवार्य है। इसी आधार पर नया टेंडर आमंत्रित किया गया है। उनके अनुसार नए सर्वेक्षण से शहर के पेड़ों का अद्यतन डेटा उपलब्ध होगा।

वृक्ष प्राधिकरण की बैठक में होगा फैसला

पुरानी एजेंसी के अधूरे कार्य पर अंतिम निर्णय अब वृक्ष प्राधिकरण की आगामी बैठक में लिया जाएगा। यानी एक तरफ मनपा नए सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर पुराने प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी और कार्रवाई का मुद्दा अभी निर्णय के इंतजार में है।

अब नजर इस बात पर है कि वृक्ष प्राधिकरण पुराने अधूरे काम को लेकर क्या निर्णय लेता है और नई वृक्ष गणना के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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