पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्सः सोशल मीडिया)
पुणे

320 करोड़ टैक्स, फिर भी सड़क-ड्रेनेज बेहाल, मनपा-MIDC की लड़ाई में पिस रहे पिंपरी-चिंचवड़ के उद्योग

Industry Infrastructure Crisis: 320 करोड़ का संपत्ति कर देने के बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ के 5,000 से अधिक उद्योग सड़क, बिजली और ड्रेनेज की बदहाली झेलने को मजबूर हैं, PCMC और MIDC के बीच फंसा मामला।

वेदांत जोशी

PCMC MIDC Property Tax Controversy: देश के प्रमुख ऑटो हब के रूप में पहचान बना चुके पिंपरी-चिंचवड़ की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हजारों लघु उद्योग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। खराब सड़कें, बारिश के पानी की निकासी, बार-बार बिजली कटौती, कचरा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं ने उद्यमियों की परेशानी बढ़ा दी है।

सबसे बड़ी दिक्कत सिर्फ सुविधाओं की कमी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने को लेकर मनपा और MIDC के बीच उलझन है। उद्यमियों का कहना है कि सड़क या ड्रेनेज की शिकायत लेकर मनपा के पास जाने पर कई बार क्षेत्र MIDC के अधिकार क्षेत्र में होने की बात कही जाती है। वहीं, MIDC में शिकायत करने पर कुछ मामलों को मनपा के कार्यक्षेत्र का बताया जाता है।नतीजा यह कि शिकायत घूमती रहती है और समस्या जस की तस बनी रहती है।

खराब सड़कें, बढ़ी उत्पादन लागत

भोसरी, पिंपरी-चिंचवड़, चिखली और तलवड़े के औद्योगिक क्षेत्रों में कई आंतरिक सड़कों की स्थिति खराब होने की शिकायत उद्यमियों ने की है। गड्ढों और खराब सड़क सतह के कारण माल ढुलाई करने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।

समय पर कच्चा माल पहुंचाने और तैयार माल भेजने में देरी होने से उद्योगों की पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है। उद्यमियों के मुताबिक, इसका सीधा असर उत्पादन लागत और ऑर्डर की समयसीमा पर पड़ रहा है।

बिजली गई तो मशीनें बंद, बढ़ता है जनरेटर का खर्च

औद्योगिक क्षेत्रों में बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने से मशीनरी रुक जाती है और उत्पादन का शेड्यूल बिगड़ जाता है। ऐसे में कंपनियों को जनरेटर चलाना पड़ता है, जिससे ईंधन का अतिरिक्त खर्च बढ़ता है।

पिंपरी-चिंचवड़ लघु उद्यमी संगठन के अध्यक्ष संदीप बेलसरे के मुताबिक, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में उद्योगों और बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसके अनुरूप बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि ऑर्डर समय पर पूरा नहीं होने पर ग्राहक दूसरे विकल्प की ओर जा सकता है। ऐसे में बिजली की समस्या सीधे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित करती है।

ड्रेनेज और कचरा प्रबंधन भी चुनौती

बारिश के दौरान जलनिकासी की समस्या कई औद्योगिक क्षेत्रों में गंभीर हो जाती है। इसके अलावा सामान्य कचरे के साथ औद्योगिक और खतरनाक कचरे के निपटारे को लेकर भी उद्यमियों ने चिंता जताई है।

औद्योगिक सीवेज के उपचार के लिए CETP परियोजना का भूमिपूजन हो चुका है, लेकिन काम की धीमी गति को लेकर उद्यमियों में नाराजगी है।

उद्योग कक्ष शुरू हुआ, अब समयबद्ध समाधान भी हो

स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज, पिंपरी-चिंचवड़ के अध्यक्ष अभय भोर ने कहा कि मनपा ने उद्योगों की शिकायतों के समाधान के लिए ‘उद्योग कक्ष’ शुरू किया है, लेकिन केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उसका समयबद्ध समाधान भी होना चाहिए।

उन्होंने मनपा, MIDC, महावितरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त व्यवस्था बनाने की मांग की, ताकि उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।

MIDC का क्या कहना है?

MIDC के अनुसार, उद्यमियों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के लिए संबंधित विभाग तत्पर रहता है। विभिन्न एजेंसियों के साथ होने वाली संयुक्त बैठकों में उद्यमियों की समस्याओं पर नियमित चर्चा की जाती है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

₹320 करोड़ का राजस्व, फिर सुविधाएं क्यों अधूरी?

पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर की 3,470 औद्योगिक कंपनियां संपत्ति कर का भुगतान करती हैं, जिससे मनपा को करीब 320 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होता है।

उद्योग संगठनों का दावा है कि शहर में औद्योगिक इकाइयों की संख्या 5,000 से अधिक है। ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, टूलिंग, फैब्रिकेशन और अन्य पूरक उत्पाद बनाने वाली ये लघु औद्योगिक इकाइयां हजारों लोगों को रोजगार देती हैं।

ऐसे में उद्यमियों का सवाल है कि जब उद्योगों से करोड़ों रुपये का राजस्व मिल रहा है, तो उन्हीं औद्योगिक क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं अब भी बदहाल क्यों हैं?

संयुक्त कार्ययोजना की मांग

उद्योग संगठनों ने मनपा और MIDC से जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के बजाय संयुक्त कार्ययोजना बनाने की मांग की है। सड़क, ड्रेनेज, बिजली, कचरा और ट्रैफिक जैसी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने की मांग की गई है।

उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि यदि बुनियादी सुविधाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ तो नए उद्योग दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों का रुख कर सकते हैं। साथ ही समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

अब असली सवाल यही है

पिंपरी-चिंचवड़ को देश का ऑटो हब बनाने वाले छोटे उद्योग यदि सड़क, बिजली और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ही विभागों के चक्कर काटते रहें, तो शहर की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर इसका असर पड़ना तय है। अब नजर इस बात पर है कि मनपा और MIDC जिम्मेदारी की सीमा तय करते हैं या उद्यमियों की समस्याएं फिर फाइलों में ही घूमती रहती हैं।

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