Moshi Garbage Depotmunicipal Project: पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के मोशी कचरा डिपो में करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित बायोगैस प्रोजेक्ट को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। स्थायी समिति की बैठक में अंतिम समय पर लाए गए।
इस प्रस्ताव का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। विपक्ष की आपत्तियों के बाद प्रशासन को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि परियोजना के नाम पर फिजूलखर्ची की जा रही है और ठेकेदार को आर्थिक लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
नगरसेविका सुलभा उबाले, नगरसेवक संदीप वाघेरे और विकास साने ने प्रशासन तथा सत्ताधारी भाजपा पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि परियोजना के तहत प्रतिदिन 375 टन कचरा प्रोसेस करने के लिए ठेकेदार को 3,661 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान किया जाना प्रस्तावित है।
इस हिसाब से सालाना भुगतान करीव 23 करोड़ रुपये और 15 वर्षों में यह राशि लगभग 344 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब अन्य शहरों में ऐसी परियोजनाएं कम लागत या बिना शुल्क के संचालित होने के उदाहरण हैं, तो महानगरपालिका पर इतना बड़ा आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है।
विपक्ष ने मोशी कचरा डिपो में पहले हुए वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट हादसे का भी मुद्दा उठाया। उस दुर्घटना में नौ लोगों की जान चली गई थी और नियमों की अनदेखी को लेकर अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। विपक्ष का कहना है कि पुराने हादसे से सबक लेने के बजाय उसी स्थान पर एक और बड़ी परियोजना शुरू करना उचित नहीं है।
नगरसेवक संदीप वाघेरे ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में कचरे से ईंधन तैयार करने वाली परियोजनाएं संचालित हो रही है और उनका उपयोग परिवहन व्यवस्था में भी किया जा रहा है। उनके मुताबिक, कई कंपनियां केवल जमीन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की शर्त पर कम लागत या मुफ्त में भी ऐसी परियोजना संचालित करने को तैयार है। इसके बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान करने वाला ठेका देने की तैयारी पर उन्होंने सवाल उठाया।
क्षमता: प्रतिदिन 375 टन गीले कचरे के प्रसंस्करण का प्रस्ताव।
उत्पादनः बायोगैस और बायो-सीएनजी तैयार करने की योजना,
वाहनों में उपयोगः तैयार गैस का इस्तेमाल कचरा परिवहन वाहनों में प्रस्तावित।
कचरा प्रबंधनः मोशी डिपी पर दबाव कम कर 'शून्य कचरा' लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना,
प्रस्तावित भुगतान: 3,661 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान का दावा।
मनपा की प्रस्तावित परियोजना में होटल और घरेलू गीले कबरे को प्रोसेस कर बायोगैस तथा बायो-सीएनजी तैयार करने की योजना थी, उत्पादित गैस का इस्तेमाल कचरा परिवहन वाहनों में करने का प्रस्ताव था, परियोजना का उद्देश्य मोशी कचरा डिपो पर कचरे का दबाव कम करना और शहर में 'शून्य कचरा' प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना बताया गया है।
विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सत्ता के बल पर इस परियोजना को दोबारा मंजूरी दिलाकर शुरू करने का प्रयास किया या तो वे आंदोलन करेंगे, उन्होंने कहा कि मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
अन्य शहरों में इस तरह के प्रोजेक्ट के आते। इंदौर में ऐसी परियोजना से परिवहन व्यवस्था भी संचालित की जा रही है। यहां पूरा पैसा ठेकेदार की जेब में डालकर सत्ताधारी अपना हित साधना चाहते हैं। प्रशासन और सत्ताधारी करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची करना चाहते हैं।
-नगरसेवक, सदीय वाघेरे