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Pune News: 4 दिन बाद बारिश पर लगा ब्रेक, पुणे में पटरी पर लौटने लगी जिंदगी

Pune News: पिछले 3 दिनों से पुणे में मूसलाधार बारिश के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन अब पानी का स्तर कम होने के बाद लोगों ने अपने घर वापस आना शुरू कर दिया है।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: तीन दिनों से पुणे शहर सहित जिले में हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। लेकिन गुरुवार को बारिश का जोर थोड़ा कम हुआ। इसके बावजूद जिले के 12 महसूल मंडलों में 65 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई।

जून से अगस्त के अंत तक जिले में औसतन 706 मिमी बारिश होती है। इस वर्ष अब तक 612 मिमी बारिश हुई है, जो औसत का 86.7 प्रतिशत है। विशेष रूप से अगस्त में औसतन बारिश 52 प्रतिशत पर ही थम गया है।

19 से 21 अगस्त के बीच मुलशी, मावल, भोर और वेल्हे तहसीलों में हुई भारी बारिश के चलते कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। उजनी डैम पूरी क्षमता से भर जाने के कारण 1.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। खडकवासला डैम से पहले जहां 39 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा था, उसे गुरुवार शाम 5 बजे तक घटाकर 17,429 क्यूसेक कर दिया गया।

स्थिति नियंत्रण में, घर लौटने लगे लोग

सिंहगढ़ रोड के एकतानगर, वारजे, कलस, फुलेनगर और ताडीवाला रोड इलाकों में पानी भर गया था। फिलहाल हालात धीरे-धीरे काबू में आ रहे है और नागरिक अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। लेकिन घरों में पानी घुसने की वजह से इसकी सफाई कराना और फिर पुनर्वास एक बड़ी चुनौती बन गई है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि नदी किनारे के इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करें और डैम से पानी छोड़े जाने संबंधी आधिकारिक निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

भूस्खलन का खतरा, नागरिकों का स्थानांतरण

  • भारी पानी छोडे जाने से भीमा नदी पर बना दरेड और कानगांव-माणगांव पुल जलमग्न हो गए हैं और वहां की ट्रैफिक पूरी तरह से बंद हो गई है
  • मुलशी तहसील के पड़लगांव और रामनगर में भूस्खलन की आशंका के चलते 11 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। पुणे महापालिका क्षेत्र के वारजे, कलस, औंध, नगर रोड, कसबा, शिवाजीनगर और ढोले पाटिल क्षेत्रों से भी बाढ़ प्रभावित परिवारों को स्कूलों और सभागृहों में शिफ्ट किया गया है।
  • अब तक जिले में कुल 345 परिवारों के लगभग 1530 नागरिकों को सुरक्षित स्थलों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सेना को एक विशेष टीम (1 अधिकारी, 5 जेसीओ और 85 जवान) भी तैनात की गई है।

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