नदी की दुर्दशा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

संकट में पवना नदी, पिंपरी-चिंचवड़ में बाढ़ का डर और बढ़ता प्रदूषण, प्रशासन आखिर कब जागेगा?

Pimpri Chinchwad Flood Risk: पिंपरी-चिंचवड़ में पवना नदी पर मंडराता संकट। अवैध अतिक्रमण और औद्योगिक कचरे से जलीय जीवन नष्ट। मानसून में बाढ़ का खतरा, जानें क्या कर रहा है प्रशासन।

गोरक्ष पोफली

Pavana River Pollution: औद्योगिक नगरी पिंपरी-चिंचवड़ में विकास की अंधी दौड़ ने शहर की जीवनरेखा, पवना नदी के अस्तित्व को गंभीर संकट में डाल दिया है। रावेत, किवले और मामुर्डी जैसे क्षेत्रों में शहरीकरण की तेज रफ्तार के बीच पर्यावरण नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिल्डरों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए प्राकृतिक नालों को मिट्टी और मलबे से पाटा जा रहा है, जिससे पानी का स्वाभाविक मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। प्रशासन की इस सुस्ती और अनदेखी के कारण आगामी मानसून में शहर को एक भीषण मानव निर्मित बाढ़ झेलनी पड़ सकती है।

पवना नदी की वर्तमान स्थिति

पवना नदी की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय और चिंताजनक है। रावेत से लेकर दापोडी तक के विस्तृत निरीक्षण में यह पाया गया है कि नदी के किनारे अब कचरे के विशाल पहाड़ों में तब्दील हो चुके हैं। नदी के पानी की सतह पर प्लास्टिक, थर्माकोल और औद्योगिक कचरे की मोटी परतें तैर रही हैं। सबसे भयावह स्थिति उन क्षेत्रों में है जो औद्योगिक बेल्ट के पास हैं, जहाँ कारखानों का जहरीला रासायनिक पानी बिना किसी उपचार के सीधे नदी में बहाया जा रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि नदी का जलीय जीवन अब 100% नष्ट हो चुका है और आसपास रहने वाले लोगों में त्वचा संबंधी बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश

इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। स्थानीय नागरिक अमित बाजारे ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारी-भरकम टैक्स देने के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। यदि अवैध रूप से पाटे गए नालों के कारण बारिश में नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी नगर निगम को लेनी होगी। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सकट के अनुसार, कभी शांति और ताजगी देने वाली यह नदी अब इतनी दुर्गंध मारती है कि इसके किनारे खड़ा होना भी दूभर हो गया है।

नगर निगम की चेतावनी

हालांकि, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के पर्यावरण विभाग के कार्यकारी अभियंता योगेश अल्हाट ने आश्वासन दिया है कि नदी में प्रदूषण और अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मलबा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई, फैक्ट्रियों के केमिकल की जांच और जल्द ही एक व्यापक नदी स्वच्छता अभियान शुरू करने का वादा किया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन घोषणाओं पर कितनी जल्दी ठोस जमीनी कार्रवाई करता है।

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