(प्रतीकात्मक तस्वीर) 
पुणे

आंबेगांव की कलंब ग्राम पंचायत में NCP की गुटबाजी उजागर, विपक्षी वोटों से हुआ ‘वर्षे’ का पलड़ा भारी

Pune News: आंबेगांव तहसील की कलंब ग्राम पंचायत में उपसरपंच पद के लिए पहली बार चुनाव हुआ। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी के चलते कमलेश वर्षे ने 11 वोटों से जीत दर्ज की।

अपूर्वा नायक

Pune News In Hindi: आंबेगांव तहसील की कलंब ग्राम पंचायत में उप सरपंच पद के चुनाव को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस के 9 सदस्यों में फूट पड़ने के कारण, कलंब ग्राम पंचायत में पहली बार उप सरपंच पद के लिए चुनाव हुआ, जिसमें कमलेश वर्षे बहुमत से निर्वाचित हुए।

यह चुनाव प्रक्रिया सोमवार दोपहर ग्राम पंचायत कार्यालय में संपन्न हुई। उपसरपंच पद के लिए हुए चुनाव में कुल 14 सदस्यों में से तीन सदस्य अनुपस्थित रहे। सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नी सदस्यों के बीच उम्मीदवारी को लेकर सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते पार्टी के अंदर से ही कमलेश बर्षे, दत्ता कानडे, अंजली भालेराव और जयश्री भालेराव ने नामांकन दाखिल किया।

वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट की ओर से नितीन भालेराव ने भी पर्चा भरा था, लेकिन उन्होंने बाद में अपना नाम वापस ले लिया, जिससे मुकाबला चार-कोणीय हो गया। इसके बावजूद, कमलेश वर्षे को कुल 11 वोट मिले और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। कमलेश वर्षे की 11 वोटों से हुई जीत यह दर्शाती है कि उन्हें न केवल राकांपा के अंदर के बहुमत का समर्थन मिला, बल्कि उन्हें विपक्षी खेमे से भी वोट प्राप्त हुए।

सुलह के प्रयास विफल, 6 माह का फॉर्मूला टूटा

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में पहले यह तय हुआ था कि कमलेश वर्षे, अंजली भालेराव, दत्ता कानडे और जयश्री भालेराव को छह-छह महीने के लिए उपसरपंच पद पर मौका दिया जाएगा, लेकिन सदस्यों के बीच सहमति न बन पाने के कारण यह समझौता टूट गया और चुनाव कराना पड़ा, चुनाव को निर्विरोध कराने के लिए पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रमोद कानडे, राकांपा नेता प्रा। दत्तात्रय भालेराव और भीमाशंकर साखर कारखाने के पूर्व संचालक रमेश कानडे सहित कई नेताओं ने प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। नवनिर्वाचित उपसरपंच कमलेश वर्षे का राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना दोनों पक्षों की ओर से सत्कार किया गया।

स्पष्ट बहुमत दिलाने में क्रॉस वोटिंग सहायक

  • चुनाव परिणाम से यह स्पष्ट हो गया कि राकांपा के नौ सदस्यों में से अनुपस्थित रहे सदस्यों के अलावा अन्य सदस्यों ने उन्हें बोट दिया।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि शिवसेना (उबाठा) गुट के तहसील प्रमुख नितीन भालेराव के तीन सदस्यों ने भी कमलेश वर्षे को अपना समर्थन दिया।
  • यह क्रॉस वोटिंग राकांपा की अंदरूनी फूट के बावजूद वर्षे को स्पष्ट बहुमत दिलाने में निर्णायक साबित हुई, जिससे राकांपा के एक धड़े और शिवसेना (उबाठा) गुट के बीच अप्रत्याशित गठबंधन उजागर हुआ।

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