मंत्री नरहरी झिरवल (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

आंदोलन करो पर खा-पीकर करो... मंत्री नरहरी झिरवल की टिप्पणी से भड़के छात्र, आंदोलन स्थल पर ही दिया करारा जवाब

Adivasi Student Protest Pune: पुणे के मांजरी में 14 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन पर डटे आदिवासी छात्रों पर नरहरी झिरवाल की टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। भड़के छात्रों ने मौके पर ही मंत्री को जवाब दिया।

गोरक्ष पोफली

Narhari Zirwal Remark Sparks Outrage: महाराष्ट्र के पुणे के मांजरी क्षेत्र में अपनी मांगों को लेकर डटे आदिवासी छात्रों के आंदोलन ने अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। पिछले 14 दिनों से अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें से कुछ छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं।

इस गंभीर माहौल के बीच, आंदोलन स्थल पर पहुंचे मंत्री नरहरी झिरवल के एक अजीबोगरीब बयान ने विवाद को हवा दे दी है, जिससे नाराज छात्रों ने उन्हें मौके पर ही बेहद तीखा जवाब सुना दिया।

मंत्री नरहरी झिरवल की अजीब सलाह

आंदोलन के 14वें दिन आंदोलनकारी छात्रों से मिलने और चर्चा करने के लिए आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और मंत्री नरहरी झिरवल मांजरी स्थित आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। दोनों मंत्रियों ने छात्रों से चर्चा की और उनका आमरण अनशन समाप्त करने की अपील की।

इसी बातचीत के दौरान, मंत्री नरहरी झिरवाल ने छात्रों को एक ऐसी सलाह दे डाली जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया। झिरवाल ने छात्रों से कहा, आप लोग खा-पीकर आंदोलन कीजिए। जब मैं आंदोलन किया करता था, तो चोरी-छिपे खा लेता था और फिर आंदोलन करता था।

नाराज छात्रों का मौके पर ही करारा पलटवार

पिछले दो हफ्तों से भूखे-प्यासे बैठे छात्रों के अनशन को लेकर इस तरह की टिप्पणी सुनकर आंदोलनकारी छात्र भड़क उठे। अनशन के कारण पहले ही कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबर थी, ऐसे में इस बयान को छात्रों के संघर्ष के मजाक के रूप में देखा गया और छात्रों के बीच नाराजगी काफी बढ़ गई।

छात्रों ने बिना देर किए मंत्री के सामने ही पलटवार करते हुए कहा, अगर हमें खा-पीकर ही आंदोलन करना होता, तो आप आज यहां चलकर हमसे मिलने आते ही नहीं।। छात्रों के इस तीखे और सीधे जवाब के बाद आंदोलन स्थल पर माहौल गरमा गया। उन पर सीधे तौर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने आदिवासी छात्रों के इस गंभीर आंदोलन और उनके उपोषण की खिल्ली उड़ाई है।

लिखित आश्वासन के बिना मानने को तैयार नहीं छात्र

इस गरमाए माहौल के बीच, आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने 15 छात्र प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल के साथ लगभग पांच घंटे तक लंबी और विस्तृत बैठक की। बैठक के बाद मंत्री अशोक उईके ने चर्चा को काफी सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की मांगों से जुड़े कुछ तकनीकी पहलू हैं, जिनकी जांच करना आवश्यक है, इसलिए निर्णय लेने के लिए सरकार की ओर से दो दिनों की मोहलत मांगी गई है।

लेकिन सरकार के इस सकारात्मक रुख के बावजूद छात्र सिर्फ मौखिक दावों पर भरोसा करने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक लिखित आदेश या ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे अपना आमरण अनशन और आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

क्या आंदोलन पकड़ेगा और जोर?

जहां एक तरफ सरकार तकनीकी पहलुओं का हवाला देकर दो दिनों का समय मांग रही है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री नरहरी झिरवाल के इस बयान ने छात्रों के आक्रोश को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अगले दो दिनों में सरकार कोई ठोस लिखित फैसला लेती है या फिर यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप अख्तियार करेगा।

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