बीड जिले के लोलाडगांव की नदी सोर्स: नाम फाउंडेशन
पुणे

नाना पाटेकर के NAAM Foundation का जलसंधारण अभियान, 10 सालों में 2246 जलस्रोतों को किया पुनर्जीवित

NAAM Foundation Report Card: नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे की NAAM Foundation ने महाराष्ट्र के 26 जिलों के 1,000 जलस्रोतों का कायाकल्प कर 22 लाख से अधिक लोगों को जल संकट से राहत दिलाई है।

आकाश मसने

NAAM Foundation Water Conservation: अभिनेता नाना पाटेकर का आज निधन हो गया। उन्होंने किसानाें के लिए NAAM Foundation की शुरुआत की थी। नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे से जुड़ी नाम फाउंडेशन ने महाराष्ट्र में जलसंधारण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम किए है। संस्था की 2025 की जिलानिहाय रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 26 जिलों में 1,000 जलस्रोतों पर जलसंधारण के अलग-अलग काम किए गए।

संस्था का दावा है कि इस दौरान 2 करोड़ 41 लाख 13 हजार 858 घनमीटर मिट्टी और गाद निकाली गई, जिससे 22 लाख 23 हजार 374 लोगों को लाभ मिला।

नाम फाउंडेशन ने पुणे में किया सबसे ज्यादा काम

नाम फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक संस्था ने पुणे जिले में सबसे अधिक काम हुआ। यहां 248 साइट्स पर काम किया गया। संस्था के अनुसार पुणे में 1 करोड़ 13 लाख 16 हजार 569 घनमीटर उत्खनन किया गया और करीब 8 लाख 48 हजार 900 लोगों को इसका लाभ मिला।

अहिल्यानगर दूसरे स्थान पर

नाम फाउंडेशन के काम के क्षेत्रफल और साइट्स की संख्या के लिहाज से अहिल्यानगर भी प्रमुख जिलों में है। यहां 265 साइट्स पर काम किया गया और 27 लाख 29 हजार 808 घनमीटर गाद-मिट्टी निकाली गई। संस्था के अनुसार इससे 5 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला।

बुलढाणा में 79 साइट्स पर 14 लाख 1 हजार 319 घनमीटर, बीड में 53 साइट्स पर 9 लाख 48 हजार 835 घनमीटर और लातूर में 28 साइट्स पर 9 लाख 48 हजार 246 घनमीटर उत्खनन किया गया। 

सिंधुदुर्ग का के नटाल गांव की नदी को किया साफ

नाम फाउंडेशन का मराठवाड़ा से विदर्भ तक काम

NAAM फाउंडेशन की जानकारी के अनुसार जलसंधारण के काम केवल पश्चिम महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहे। मराठवाड़ा के बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड, हिंगोली और छत्रपति संभाजीनगर, जबकि विदर्भ के बुलढाणा, नागपुर, गडचिरोली, गोंदिया, भंडारा, अमरावती, यवतमाल, चंद्रपुर और वर्धा जिलों में भी काम किए गए हैं।

इसके अलावा सांगली, सातारा, कोल्हापुर, सोलापुर, जलगांव, नंदुरबार, ठाणे और पालघर जिलों में भी जलसंधारण परियोजनाओं पर का किया हैं।

पुणे के गांवों में नाला, ओढा और तालाबों का काम

NAAM फाउंडेशन की परियोजना संबंधी जानकारी के अनुसार पुणे जिले के खेड, भोर, पुरंदर और मुलशी तहसीलों में विभिन्न जलसंधारण कार्य किए गए हैं। चिंचबलवाडी में ओढा-नाला गहरीकरण और चौड़ीकरण, सासेवाडी में नाला गहरीकरण, मानेरवाडी में ओढा-नाला गहरीकरण तथा वेडे-बोधे में पाझर तालाब से गाद निकालने का काम दर्ज है।

पुरंदर के मांढर में ओढा-नाला गहरीकरण के साथ पाझर तालाब से गाद निकालने का काम भी किया गया है। इन परियोजनाओं की अलग-अलग CSR रिपोर्ट में खर्च और लाभार्थियों की जानकारी दी गई है।

खडकवासला में भी गाद निकाली

नाना पाटेकर के नाम फाउंडेशन ने पुणे के खडकवासला जलाशय में भी गाद निकालने का काम किए जाने की जानकारी दी है। संस्था के अनुसार गाद निकाली गई। निकाली गई मिट्टी किसानों को उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है।

पुणे जिले के खड़कवासला बांध से गाद निकाली

10 वर्षों में 2,246 जलस्रोतों के पुनरुज्जीवन का दावा

NAAM Foundation के मुताबिक वर्ष 2015 से 2025 के बीच महाराष्ट्र में 2,246 जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया। 178 नदियों के पुनर्जीवन, 515 नालों और ओढों के गहरीकरण-चौड़ीकरण तथा 769 पाझर तालाबों के पुनर्जीवन पर काम किया गया।

संस्था के अनुसार इस अवधि में 26 बांधों से गाद निकाली गई तथा 53 गांवों में 467 किलोमीटर CCT और Deep CCT का काम किया गया। कुल 5.85 करोड़ घनमीटर से अधिक उत्खनन तथा करीब 14.43 टीएमसी जलसंचय क्षमता निर्माण में मदद मिलने का दावा भी किया गया है।

- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट

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