नाना पाटेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पंच तत्व में विलीन हुए क्रांतिवीर, नाना पाटेकर का पैतृक गांव में संपन्न हुआ अंतिम संस्कार

Nana Patekar Last Rites: क्रांतिवीर के अंतिम संस्कार की रस्में नाना पाटेकर के पैतृक गांव में संपन्न हुईं। श्रद्धांजलि के साथ उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ। जानें पूरी खबर।

गोरक्ष पोफली

Nana Patekar Funeral At Ancestral Village: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और जाने-माने समाजसेवक नाना पाटेकर पंच तत्व में विलीन हो गए हैं, और उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न हुआ। अपने अद्वितीय अभिनय, क्रांतिवीर के रूप में बेबाक पहचान और समाज सेवा के लिए पहचाने जाने वाले इस महान कलाकार के निधन से पूरा देश स्तब्ध है। उनके चले जाने से देश ने एक बहुत बड़ा कलाकार और सच्चा समाजसेवक हमेशा के लिए खो दिया है।

गोवा से पुणे लाया गया पार्थिव शरीर

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन सुबह के समय गोवा में हुआ था। गोवा में निधन होने के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से पुणे लाया गया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पुणे पहुंचा, पुणे एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और अंतिम प्रणाम किया। मुख्यमंत्री द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने के बाद पार्थिव शरीर को आगे की विधियों के लिए रवाना किया गया।

पैतृक गांव डोनजे में अंतिम यात्रा और संस्कार

पुणे एयरपोर्ट से पार्थिव शरीर को पुणे ग्रामीण स्थित उनके गृह और पैतृक गांव डोनजे ले जाया गया। डोनजे गांव महाराष्ट्र के पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित एक प्रसिद्ध और अत्यंत खूबसूरत गांव है। यह इलाका ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले की तलहटी में बसा हुआ है। इसी डोनजे गांव स्थित उनके निवास स्थान पर अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक और पारंपरिक विधियां संपन्न हुईं।

दिग्गज नेताओं और फिल्मी सितारों की मौजूदगी

नाना पाटेकर के पैतृक गांव डोनजे में आयोजित इस अंतिम संस्कार में राजनीतिक, सामाजिक और कला जगत के कई दिग्गज शामिल हुए। इस दुखद अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित राज्य मंत्रिमंडल के कई प्रमुख मंत्री उपस्थित रहे। इसके साथ ही मराठी सिनेमा और बॉलीवुड के कई जाने-माने सीनेस्टार भी अपने प्रिय साथी और कलाकार को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

गमगीन माहौल और नम आंखों से विदाई

अंतिम संस्कार के दौरान वहां मौजूद सभी मंत्रियों, नेताओं, सीनेस्टारों और स्थानीय ग्रामीणों के चेहरों पर गहरा शोक व्याप्त था और सभी की आंखें नम थीं। ऐतिहासिक सिंहगढ़ किले की तलहटी में बसे डोनजे गांव में संपन्न हुए इस अंतिम संस्कार के साथ ही देश ने अपने एक महान कलाकार और समर्पित समाजसेवक को नम आंखों से विदाई दी।

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