पुणे मनपा, सुरक्षा गार्ड नियुक्ति,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

पुणे मनपा में बढ़ा जनप्रतिनिधियों का दखल: सुरक्षा गार्ड भर्ती में ‘अपने लोगों’ को नौकरी दिलाने का दबाव

Pune Municipal Corporation: पुणे मनपा में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति को लेकर नगरसेवकों के हस्तक्षेप के आरोप सामने आए हैं। प्रशासन पर सिफारिश वाले लोगों को नौकरी देने का दबाव बनाया जा रहा है।

अंकिता पटेल

Pune Security Guard Recruitment: पुणे शहर के विकास और नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए चुने गए जनप्रतिनिधि अब महानगरपालिका की सुरक्षा व्यवस्था में भी दखल देने लगे हैं। पुणे महानगरपालिका के गार्डन, स्कूलों और कार्यालयों में तैनात किए जाने वाले सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति को लेकर नगरसेवकों का हस्तक्षेप बढ़ गया है। हमारे वार्ड में बाहरी लोग नहीं चलेंगे, केवल हमारे बताए लोगों को ही नौकरी दी जाए। इस तरह का दबाव प्रशासन पर बनाया जा रहा है।

कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाएंगे गार्ड

पुणे मनपा की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए ठेका पद्धति से सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने का काम संबंधित एजेंसियां को दिया गया है। नियमों के अनुसार, इन गाड़ों की नियुक्ति शहर के किसी भी हिस्से में की जा सकती है। लेकिन हाल ही में निर्वाचित कई नगरसेवक अपने-अपने प्रभाग के स्कूलों और गार्डन पर प्रभाव बनाए रखने के लिए अपने समर्थकों या कार्यकर्ताओं को वहां नियुक्त कराने पर जोर दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे एजेंसियों द्वारा भेजे गए सुरक्षा गाडों को हटाकर नगरसेवकों की सिफारिश वाले लोगों को काम पर रखें। इतना ही नहीं, मांग पूरी न होने पर काम में अड़चनें पैदा करने और तबादले की धमकियां देने जैसे मामले भी सामने आए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर खतरा

सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य करने के लिए अनुशासन और प्रशिक्षण आवश्यक होता है। लेकिन यदि नियुक्तियां केवल राजनीतिक सिफारिश के आधार पर होंगी तो इससे महानगरपालिका की संपत्तियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसे गार्ड अपनी ड्यूटी निभाने की बजाय राजनीतिक आकाओं की सेवा में अधिक रुचि दिखा सकते हैं।

अधिकारी दोहरी मुश्किल में

सुरक्षा विभाग के अधिकारी इस राजनीतिक दबाव के कारण असमंजस की स्थिति में है। एक और एजेंसियों द्वारा भेजे गए अनुभवी गार्डों को हटाना नियमों के खिलाफ है, वहीं दूसरी ओर नगरसेवकों के दबाव को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है। यदि नियमों को दरकिनार कर राजनीतिक नियुक्तिया की जाती हैं और भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है, तो जवाबदेही का सवाल भी खड़ा होगा।

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द, UP पर 10 लाख जुर्माना

दिल्ली के इंदिरा भवन में CWC की बैठक, CEC को कहा मोदी सरकार की कठपुतली; इस्तीफे की मांग की

भारत को मिला अफगानिस्तान का नया रास्ता, 730 किमी चाबहार-जहेदान रेल लिंक पूरा, 3-4 महीने में दौड़ेगी ट्रेन

देश के कई हिस्सों में NIA की ताबड़तोड़ कार्रवाई; असम, बंगाल और केरल में तलाशी अभियान

चुनाव आयोग को घेरने की तैयारी में जुटी कांग्रेस, आज CWC की बैठक बुलाई; आगे की रणनीति पर मंथन