Ajit Pawar family (सोर्सः सोशल मीडिया) 
पुणे

मुंढवा भूमि सौदे में पार्थ पवार को क्लीन चिट, हस्ताक्षर न होना बना बचाव का आधार

Parth Pawar Clean Chit: पुणे के मुंढवा 1800 करोड़ जमीन सौदे मामले में पार्थ पवार को जांच समिति ने क्लीन चिट दी है। रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न होने के कारण उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता नही

आंचल लोखंडे

Mundhwa Land Deal Case: अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को पुणे के बहुचर्चित मुंढवा जमीन सौदे मामले में बड़ी राहत मिली है। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें पार्थ पवार को क्लीन चिट दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भाजपा नेता और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंपी गई है। वे इसे जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विचारार्थ प्रस्तुत करेंगे।

प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई

समिति के निष्कर्षों के अनुसार, मुंढवा स्थित जमीन के सौदे से संबंधित किसी भी दस्तावेज पर पार्थ पवार के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। वे संबंधित कंपनी ‘अमेडिया’ में भागीदार हैं, लेकिन जमीन की वास्तविक खरीद प्रक्रिया में उनकी कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई। इसी आधार पर समिति ने उन्हें इस मामले से अलग रखा है।

यह है पूरा मामला

यह विवाद पुणे के मुंढवा क्षेत्र में स्थित लगभग 1,800 करोड़ रुपये मूल्य की ‘महार वतन’ जमीन से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर करीब 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इस सौदे में लगभग 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी माफ किए जाने का भी आरोप है।

विरोध और निरस्तीकरण

विपक्ष के भारी विरोध के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सौदे को रद्द करने की घोषणा की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विकास खरगे की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया था।

जांच रिपोर्ट की मुख्य बातें

पार्थ पवार की भूमिका: कंपनी में हिस्सेदारी होने के बावजूद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न होने के कारण जमीन खरीद में उनका सीधा संबंध नहीं पाया गया।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: तत्कालीन तहसीलदार सूर्यकांत येवले और उप-निबंधक रवींद्र तारू के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। दोनों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

कानूनी कार्रवाई का सुझाव: ‘अमेडिया’ कंपनी की ओर से सौदे की कागजी प्रक्रिया पूरी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

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