Pimpri Chinchwad MPCB Fine Four Companies: पवना नदी को जहरीला बनाने और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर प्रशासन का शिकंजा कस गया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) ने मावल और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र की चार प्रमुख
औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए कुल 2 करोड़ 56 लाख 57 हजार 500 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। एमपीसीबी ने इस बाबत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ में एक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल कर पूरी रिपोर्ट सौंपी है।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) द्वारा की गई विशेष जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई उद्योगों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) या तो पूरी तरह बंद पड़े थे या उन्हें निष्क्रय रखा गया था।
कारखानों से निकलने वाला रासायनिक व दूषित पानी बिना किसी उपचार के सीधे बाहर नालों में बहाया जा रहा था, जो आगे जाकर सीधे पवना नदी के जलस्रोत को प्रदूषित कर रहा था। इसके अलावा, औद्योगिक गाद (स्लज) और ठोस कचरे का भंडारण भी अवैध व असुरक्षित तरीके से पाया गया।
नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्धारित फॉर्मूले और उल्लंघन की अवधि के आधार पर चारों कंपनियों पर जुर्माना तय किया गया है। गंगा पेपर्स इंडिया लिमिटेड पर 570 दिनों तक लगातार नियमों के उल्लंघन के लिए सबसे अधिक 1 करोड़ 71 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति तय की गई है।
राइजिंग प्रॉपकॉन एलएलपी पर 167 दिनों के उल्लंघन पर 62 लाख 62 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगा है। मैनेग्रो एग्रो प्रोडक्ट्स प्रा.लि. पर 166 दिनों की लापरवाही के लिए 20 लाख 75 हजार रुपये का दंड निर्धारित किया गया है। वहीं कराग्या फू प्रा.लि. पर 38 दिनों की कमियों के आधार पर 3 लाख 80 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
मैनेग्रो एग्रो में बंद मिले ट्रीटमेंट प्लांट मावल स्थित इस इकाई के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कंपनी चिना वैध अनुमति ('कसेंट टू रिन्यूअल) के अवैध रूप से चल रही थी। ईटीपी और एसटीपी दोनों प्लांट पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए, हस्क व बगास धोने का जहरीला पानी और गाद से निकलने वाला खतरनाक लीवेट सीधे पास के नाले में बहकर पवना नदी में मिल रहा था।
एमपीसीबी की इस आक्रामक कार्रवाई से पवना नदी तट क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी हड़कंप मच गया है। गंगा पेपर्स में खुले में पड़ा था स्लज जांच टीम को गंगा पेपर्स के परिसर में बड़ी मात्रा में स्लज (गाद) खुले में बिखरा मिला। बारिश के पानी के साथ यह जहरीला कचरा बहकर नदी की ओर जा रहा था। साथ ही, पावर प्लांट और कर्मचारियों के स्नान गृह का अनरीटेड पानी भी नाले में बहाया जा रहा था
राइजिंग प्रॉपकॉन के पास कचरे का ढेर यहां एसटीपी तो चालू मिला, लेकिन नाले के उद्गम स्थल के पास बड़े पैमाने पर निर्माण कचरा (सीएंडडी वेस्ट) फेंककर जमीन समतल की जा रही थी और नाले में दूषित पानी छोड़ने के साक्ष्य मिले।
कराग्या फूड़ में भी पाई गईं खामियां हालांकि कराग्या फूड़ में ईटीपी चालू था, लेकिन कंपनी ने । लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा नहीं की थी और न ही केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रस्तुत किया था।