प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: AI
पुणे

पुणे में तीन महीनों में मानसून के 3 रंग, जून-अगस्त में पड़ा सूखा, सितंबर में भी कम बारिश के आसार से बढ़ी चिंता

Pune Monsoon Rainfall Crisis:पुणे में जून में सूखा, जुलाई में भारी बारिश और अगस्त में फिर मानसून सुस्त रहा। अब मौसम विभाग ने सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश और तापमान बढ़ने का अनुमान जताया है।

रूपम सिंह

Pune Monsoon Rain Statistics: पुणे जिले में इस वर्ष मानसून ने तीन महीनों में तीन बिल्कुल अलग रंग दिखाए हैं। जून में बारिश ने निराश किया, जुलाई में रिकॉर्डतोड़ बारिश ने शहर और जलाशयों को तरबतर कर दिया, जबकि अगस्त में मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया। अब सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश और तापमान में वृद्धि के पूर्वानुमान ने पुणे की चिंता बढ़ा दी है। जून से अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही।

जून में पुणे को सामान्य 152.9 मिमी के मुकाबले केवल 64 मिमी बारिश मिली, जो सामान्य से 58.1 प्रतिशत कम थी। इसके बाद जुलाई में मौसम ने अचानक करवट ली और पुणे में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया। जुलाई में पुणे में सामान्य 190 मिमी के मुकाबले 508.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से करीब 167.8 प्रतिशत अधिक रही।

लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने जून की भारी कमी को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया और शहर में मानसूनी बारिश का आंकड़ा तेजी से ऊपर पहुंच गया। जुलाई की इस असाधारण बारिश का असर जलाशयों पर भी पड़ा और पुणे को पानी उपलब्ध कराने वाले प्रमुख बांध लगभग भर गए। जुलाई की बारिश के बाद अगस्त में मानसून ने अचानक रफ्तार खो दी।

सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज

शिवाजीनगर समेत पुणे शहर के कई हिस्सों में अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई। महीने में करीब 80.8 से 84.5 मिमी बारिश हुई, जिससे अगस्त में लगभग 44.5 प्रतिशत की वर्षा कमी दर्ज की गई। इस प्रकार पुणे में मानसून का पैटर्न बेहद असामान्य रहा। जून में सूखा, जुलाई में जलप्रलय जैसी बारिश और अगस्त में फिर सूखे जैसी स्थिति।

खेती पर भी पड़ सकता है भारी असर

मौसम विभाग ने सितंबर में सामान्य से कम बारिश और तापमान में वृद्धि की संभावना जताई है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो जुलाई की बारिश से बना मौजूदा अधिशेष तेजी से कम हो सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सितंबर में बारिश कमजोर रहने पर बांधों और जलाशयों में नए पानी की आवक घटेगी, जबकि अधिक तापमान के कारण वाष्पीकरण बढ़ सकता है। पुणे और पिपरी-चिंचवड जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में पानी की लगातार मांग को देखते हुए जल प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ सकती है। कम बारिश और बढ़ते तापमान का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है।

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