Pune Traffic Planning: पुणे शहर इतनी तेजी से विकसित होगा, इसका अंदाजा नहीं था। इसी कारण शहर की सड़कों और बुनियादी सुविधाओं के नियोजन में कमी रह गई। मुंबई-पुणे महामार्ग का निर्माण करते समय भविष्य की यातायात जरूरतों का सही अनुमान लगाना चाहिए था। यह स्वीकारोक्ति केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुणे यातायात जाम और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझने के बावजूद लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है और शहर लगभग 'हाउसफुल' हो चुका है।
ऐसे में केवल मौजूदा समस्याओं के अस्थायी समाधान ढूंढने के बजाय अगले 50 वर्षों को ध्यान में रखकर बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाना जरूरी है। वे लवले स्थित सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
गडकरी ने पुणे के बढ़ते ट्रैफिक पर कहा कि चांदनी चौक समेत शहर की सड़कों पर बढ़ा दबाव कहीं न कहीं उनकी भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'मुझे अंदाजा नहीं था कि पुणे इतनी तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने सड़क निर्माण और रखरखाव में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया, उन्होंने कहा कि ड्रोन, एआई, लिडार और सैटेलाइट तकनीक के जरिए सड़कों की खामियों का पहले ही पता लगाया जा सकता है।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. विद्या येरवडेकर, उप-कुलपति डॉ. रामकृष्णन रमण, मेडिकल एवं हेल्थ साइंस फैकल्टी के प्रमुख डॉ. राजीव येरवडेकर तथा कुलसचिव डॉ. एम. एस. शेजूल उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जब वे महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी (सार्वजनिक निर्माण) मंत्री थे, तब मुंबई-पुणे महामार्ग के लिए चार लेन का प्रस्ताव था। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने छह लेन का आग्रह किया था। हालांकि, आज छह लेन का यह एक्सप्रेसवे भी ट्रैफिक के सामने छोटा साबित हो रहा है।
केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बताया कि 'रिपेयर आफ्टर फेल्योर' (खराब 'प्रेडिक्ट बिफोर फेल्योर' (खराबी से पहले अनुमान) की नीति अपनाकर समय रहते रखरखाव किया जाना चाहिए, युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ नैतिकता भी जरूरी है। ईमानदारी, विश्वसनीयता, गुणवत्ता और मूल्यों को जीवन में बनाए रखना चाहिए: शॉर्टकट से लंबी सफलता नहीं मिलती।
देश में चल रही विभिन्न महामार्ग और सुरंग परियोजनाओं की जानकारी देते हुए गडकरी ने दिल्ली-मुंबई महामार्ग, जोजिला टनल, जम्मू-श्रीनगर मार्ग तथा पूर्वोत्तर भारत के हाइवे का उल्लेख किया। धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि 'कनेक्टिविटी के साथ अवसरों का निर्माण' इसका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
पुणे-शिरूर, हडपसर-यवत, तलेगांव-चाकण-शिक्रापुर और खेड-नाशिक फाटा मार्गों पर विभिन्न परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पुणे-छत्रपति संभाजीनगर मार्ग को छह लेन करने का काम भी जारी है। गडकरी ने जानकारी दी कि इन विभिन्न सड़क एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर आने वाले समय में करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।