Maharashtra Hailstorm Warning: महाराष्ट्र के किसानों के लिए आने वाले कुछ दिन अग्निपरीक्षा के समान होने वाले हैं। राज्य सरकार और मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 20 से 22 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। चिलचिलाती धूप के बीच अब आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और बेमौसम बारिश का साया मंडरा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं सोशल मीडिया के जरिए नागरिकों और किसानों को सतर्क रहने की जानकारी साझा की है। राज्य के कृषि विभाग ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार, इस मौसमी बदलाव की शुरुआत 19 अप्रैल की दोपहर से ही पश्चिमी महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों, उत्तरी खानदेश और दक्षिणी मराठवाड़ा से होने की संभावना है। दोपहर के बाद अचानक आसमान में घने बादल छा सकते हैं, जिसके साथ तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका जताई गई है, जो इस समय खेतों में खड़ी या कटी हुई फसलों के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है।
20 और 21 अप्रैल को इस चक्रवाती प्रभाव का दायरा और अधिक बढ़ने की संभावना है। पुणे डिवीजन, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) डिवीजन और विदर्भ के अमरावती सहित मराठवाड़ा के दक्षिणी हिस्सों में आंधी-तूफान का सबसे ज्यादा असर देखा जा सकता है। तेज हवाओं की गति इतनी अधिक हो सकती है कि कच्चे मकानों और पेड़ों को नुकसान पहुँचने की आशंका है। हालांकि, 22 अप्रैल से इस बारिश की तीव्रता और इसके प्रभाव क्षेत्र में धीरे-धीरे कमी आने के संकेत मिले हैं, जिससे राहत की उम्मीद की जा सकती है।
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से युद्ध स्तर पर सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने अपनी फसलों की कटाई कर ली है, वे तुरंत उसे तिरपाल से ढक दें या किसी सुरक्षित गोदाम में शिफ्ट करें। मौसम के इस अनिश्चित मिजाज को देखते हुए खेती के अगले कामों की प्लानिंग कुछ दिनों के लिए टालने की सलाह दी गई है। विशेषकर फल उत्पादक किसानों (अंगूर और आम) को ओलों से बचाव के लिए नेटिंग और अन्य सुरक्षात्मक उपाय करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में त्वरित सहायता पहुँचाई जा सके। नागरिकों को सलाह दी गई है कि गरज-चमक के दौरान पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास शरण न लें। खानदेश और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में, जहाँ पिछली बार बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई थी, वहां स्थानीय प्रशासन द्वारा मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए कहा जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करना है।