Maharashtra Land Revenue Code NA Certificate Rule: जमीन खरीदने के बादघर बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब आवासीय निर्माण के लिए कृषि जमीन को अलग से 'गैर-कृषि' (एनए) कराने, जिलाधिकारी कार्यालय की मंजूरी लेने और गैर-कृषि उपयोग प्रमाणपत्र का इंतजार करने की लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी।
महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता में किए गए संशोधन के बाद नियोजन प्राधिकरण से विकास अथवा निर्माण अनुमति मिलते ही संबंधित जमीन के उपयोग को गैर-कृषि उपयोग के लिए मान्यता देने की प्रक्रिया उसी अनुमति के साथ आगे बढ़ेगी। इसके लिए अलग से एनए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विकास अथवा निर्माण अनुमति प्राप्त होने के बाद गृह कर्ज या अन्य वित्तीय सहायता के लिए बैंक और वित्तीय संस्थाएं अलग से गैर-कृषि उपयोग प्रमाण पत्र की मांग न करें। इस बदलाव से एक ओर निर्माण अनुमति की प्रक्रिया सरल होगी,
वहीं दूसरी ओर जमीन मालिकों को राजस्व विभाग के अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से पुणे महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण और फ्रिज क्षेत्रों में इसका सीधा असर पड़ सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से गैर- कृषि उपयोग से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव किया है।
राजस्व एवं वन विभाग ने 10 फरवरी 2026 को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, जहां विकास या निर्माण की अनुमति नियोजन प्राधिकरण द्वारा दी जा रही है, वहां अलग से गैर-कृषि अनुमति की प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं होगी।
निर्माण अथवा विकास अनुमति जारी करते समय संबंधित जमीन के उपयोग परिवर्तन के लिए निर्धारित एकमुश्त रूपांतरण अधिमूल्य (कन्वर्जन प्रीमियम) वसूला जाएगा। इससे जमीन के उपयोग में बदलाव से जुड़ी राजस्व प्रक्रिया को निर्माण अनुमति की प्रक्रिया के साथ जोड़ा गया है।
कृषि क्षेत्र में आवासीय उपयोग की अनुमति अनुमति के के लि लिए वार्षिक मूल्य दर तालिका (रेडी रेकनर) में निर्धारित दर के आधार पर 15 प्रतिशत अधिमूल्य वसूलने का प्रावधान बताया गया है यानी जमीन मालिक को अलग से एनए प्रक्रिया शुरू करने के बजाय नियोजन अनुमति के दौरान ही निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
हालांकि, एनए प्रक्रिया सरल होने का अर्थ यह नहीं है। जमीन पर सीधे निर्माण की अनुमति मिल जाएगी। विकास प्रस्तावों के लिए आवश्यक चौड़ाई वाली पहुंच सड़क और क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण शर्त बनी रहेगी।
स्वीकृत क्षेत्रीय योजना में दर्शाए गए मार्गों के साथ-साथ वास्तविक रूप से मौजूद और नियमानुसार विचार किए जा सकने वाले प्रस्तावित मार्गों को भी ध्यान में रखा जाएगा। नियोजन प्राधिकरण द्वारा सड़क की उपलब्धता, पहुंच और अन्य विकास मानदंडों की जांच के बाद ही प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा।
भू-राजस्व संहिता में हुए संशोधन के कारण विकास अथवा निर्माण अनुमति के बाद अलग से गैर-कृषि उपयोग प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं रह गई है। पीएमआरडीए ने भी फ्रिज एरिया में आवासीय विकास के लिए - कार्यप्रणाली निर्धारित की है। आवश्यक पहुंच -मार्ग, सड़कों की कनेक्टिविटी और अन्य नियोजन संबंधी मानदंड पूरे करने वाले प्रस्तावों पर - नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।दीपक वराडे, निदेशक (प्रभारी), विकास अनुमति विभाग, पीएमआरडीए
पीएमआरडीए के अधिकार क्षेत्र में आने वाले फिंज एरिया के लिए भी इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूडीसीपीआर के प्रावधानों के अनुसार, महानगरपालिका सीमा से दो किलोमीटर, नगर परिषद सीमा से एक किलोमीटर और नगर पंचायत सीमा से आधा किलोमीटर तक की दूरी में आने वाली कृषि जमीनों पर निर्धारित अधिमूल्य वसूल कर आवासीय उपयोग की अनुमति देने की व्यवस्था है।