महाराष्ट्र में ज़मीन बिक्री का नया नियम (सोर्स: AI)
पुणे

महाराष्ट्र में जमीन विवाद रोकने के लिए बदलेगा रजिस्ट्री का तरीका, पहले होगी नाप-जोख, 1 सितंबर से प्रयोग

Maharashtra Land Sale New Rule: जमीन की खरीद-बिक्री के बाद होने वाले सीमा और स्वामित्व विवाद रोकने के लिए महाराष्ट्र के 10 जिलों में 1 सितंबर से रजिस्ट्री से पहले नाप-जोख की नई व्यवस्था होगी।

आलोक उमाकृष्ण

Land Sale New Rule In Ten Districts: जमीन की खरीद-बिक्री के बाद होने वाले सीमा और स्वामित्व संबंधी विवादों को रोकने के लिए भूमि अभिलेख विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

अब बिक्री विलेख के पंजीकरण से पहले संबंधित जमीन की नाप-जोख कराने का उपक्रम राज्य के 10 जिलों में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जाएगा। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद 1 सितंबर से इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।

इन 10 जिलों में पिछले दो महीनों से भूमि नाप-जोख में लगने वाले समय को कम करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे थे। इसमें सफलता मिलने के बाद अब आवेदन दाखिल होने के बाद सामान्य नाप-जोख 28 दिनों में, जबकि त्वरित नाप-जोख 14 दिनों में पूरी करने की योजना बनाई गई है।

जमीन की नाप-जोख के बाद ही होगी रजिस्ट्री

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने महाराष्ट्र में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े विवादों को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने के संकेत दिए हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी भूमि की नाप-जोख पूरी हुए बिना बिक्री विलेख का पंजीकरण नहीं करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य जमीन की सीमा और स्वामित्व को लेकर भविष्य में होने वाले विवादों को कम करना है। मंत्री ने यह भी कहा था कि बिक्री विलेख का पंजीकरण होने के बाद ही संबंधित जमीन के रिकॉर्ड में फेरफार किया जाना चाहिए।

इससे जमीन के दस्तावेजों में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड में गलत या विवादित फेरफार की संभावना कम होगी। सरकार इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पहले चरण में इन जिलों को किया शामिल

भूमि अभिलेख विभाग ने पहले चरण में 10 जिलों का चयन किया है। इन जिलों में लंबित नाप-जोख मामलों का निपटारा कर नए प्राप्त होने वाले आवेदनों पर 28 दिनों के भीतर कार्रवाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

नंदुरबार, भंडारा, गड़चिरोली, गोंदिया, चंद्रपुर, परभणी, जालना, हिंगोली, नांदेड और मुंबई उपनगर इन 10 जिलों में यह उपक्रम प्रायोगिक तौर पर लागू किया जाएगा, इन जिलों में भूमि नाप-जोख का औसत समय राज्य के औसत समय की तुलना में कम होने के कारण इनका चयन किया गया है।

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