Ketan Agarwal Murder Case Deleted Chat Code Language: महाराष्ट्र के लोनावला में हुए बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुणे ग्रामीण पुलिस के हाथ एक बहुत बड़ी और तकनीकी कामयाबी लगी है। पुलिस ने मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल तथा उसके प्रेमी चेतन चौधरी के मोबाइल फोन से डिलीट किया गया चैट और डेटा पूरी तरह रिकवर कर लिया है।
इस डेटा के विश्लेषण से बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए साधारण बातचीत के बजाय विशेष 'कोड भाषा' (सांकेतिक शब्द) और उपनामों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस बीच, पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट ने दोनों को जेल भेज दिया है।
पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने पर शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को दोनों आरोपियों को वडगांव मावल स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. एम. विभूते की अदालत में पेश किया गया। जांच अधिकारी मनोज पवार और सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपियों के पास से जब्त 3 मोबाइल फोन से जो डेटा मिला है, उसमें बेहद संदिग्ध कोड वर्ड हैं।
इस आपराधिक साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश करने के लिए दोनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करना जरूरी है, जिसके लिए 3 दिन की और पुलिस कस्टडी दी जाए। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील विपुल दुशिंग के तर्कों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने पुलिस कस्टडी की मांग खारिज कर दी और दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की जांच में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी चेतन चौधरी का बीड (Beed) का रहने वाला एक कॉलेज सहपाठी इस पूरी खौफनाक साजिश से पहले से वाकिफ था। कॉल डेटा और चैट से पता चला है कि वह मई के आखिरी सप्ताह से ही चेतन के लगातार संपर्क में था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस दोस्त ने चेतन और सिया गोयल दोनों को केतन अग्रवाल की जान लेने जैसा आत्मघाती और घिनौना कदम न उठाने के लिए काफी समझाया था और मिन्नतें की थीं। पुलिस अब इस दोस्त को एक महत्वपूर्ण सरकारी गवाह बनाने और उसका विस्तृत बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में है।
अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट को लेकर भी लंबी बहस हुई। इस पर न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी की स्पष्ट कानूनी सहमति के बिना उसका नार्को टेस्ट नहीं कराया जा सकता। इसके बाद सरकारी वकील ने भी माना कि चूंकि तकनीकी डेटा और चैट पहले ही रिकवर हो चुके हैं, इसलिए इस शुरुआती चरण में नार्को टेस्ट की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। फिलहाल, पुलिस अब रिकवर किए गए डेटा के आधार पर केस को अदालत में मजबूत करने के लिए अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने में जुटी है।