Pune IT hub Civic Problems: राजीव गांधी आईटी पार्क के कारण देश-दुनिया में पहचान बना चुके हिंजवड़ी और आसपास के सात गांवों के प्रशासनिक भविष्य को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति है। हिंजवड़ी, गहुंजे, जांबे, मारुंजी, मान, नेरे और सांगवडे को पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में शामिल करने का प्रस्ताव पिछले करीब 12 वर्षों से लंबित है।
हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा हिंजवड़ी को पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में शामिल करने की घोषणा के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध तेज होने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, क्षेत्र के लिए अलग नगर निकाय गठित करने की मांग भी लगातार उठ रही है।
हिंजवड़ी आईटी पार्क में रोजाना बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और कर्मचारी पहुंचते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में सड़क, यातायात, जलापूर्ति, सीवेज और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। मानसून के दौरान जलभराव और खराब सड़कों की समस्या भी सामने आती है।
हिंजवड़ी परिसर में ग्राम पंचायत, एमआईडीसी, पीएमआरडीए और लोक निर्माण विभाग जैसी अलग-अलग एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र होने के कारण विकास कार्यों में समन्वय की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
हिंजवड़ी समेत सात गांवों को पुणे मनपा में शामिल करने का प्रस्ताव फरवरी 2015 में मनपा की सभा में मंजूर किया गया था। इसके बाद जून 2015 में प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया। इन गांवों के शामिल होने पर पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका का क्षेत्रफल करीब 51.11 वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा।
प्रस्तावित विलय में शामिल गहुंजे का क्षेत्रफल 5.05 वर्ग किलोमीटर, जांबे 6.37, मारुंजी 6.55, हिंजवड़ी 8.33, मान 19.05, नेरे 5.32 और सांगवडे 3.44 वर्ग किलोमीटर है। इस तरह सातों गांवों का कुल क्षेत्रफल करीब 51.11 वर्ग किलोमीटर है।
विलय के समर्थकों का मानना है कि एक ही प्रशासन के तहत आने से सड़क, जलापूर्ति, सीवेज, कचरा प्रबंधन और उद्यान जैसी नागरिक सुविधाओं की योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई और लागू की जा सकती हैं।
चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर, ग्रेड सेपरेटर और आधुनिक अंडरपास जैसे बड़े प्रकल्पों को भी एकीकृत प्रशासन के माध्यम से गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए मेट्रो और बीआरटीएस जैसे विकल्पों पर भी समन्वित नियोजन किया जा सकता है।
दूसरी ओर, कुछ स्थानीय नागरिक मनपा में विलय का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि विलय के बाद संपत्ति कर में वृद्धि हो सकती है, स्थानीय सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है और जनप्रतिनिधित्व भी कम हो सकता है। इसके लिए वाकड, ताथवडे और पुनावले के पूर्व उदाहरणों का हवाला दिया जा रहा है।
इसी वजह से हिंजवड़ी और आसपास के गांवों के लिए अलग नगर परिषद अथवा 'क' श्रेणी का स्वतंत्र नगर निकाय बनाने की मांग भी उठ रही है। समर्थकों का तर्क है कि स्वतंत्र प्रशासन होने से क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। हालांकि, सीमित आर्थिक संसाधनों और कम मनुष्यबल के कारण सड़क, जल निकासी और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं के विकास को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
फिलहाल हिंजवड़ी समेत सात गांवों के प्रशासनिक भविष्य को लेकर दो प्रमुख विकल्प सामने हैं, पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका में विलय या स्वतंत्र नगर निकाय का गठन। लंबे समय से लंबित इस फैसले पर अंतिम निर्णय के बाद ही क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।