Supriya Sule Sunetra Pawar (फोटो क्रेडिट-X) 
पुणे

ननद-भाभी के रिश्तों पर सियासत भारी: बारामती उपचुनाव के लिए कांग्रेस और एनसीपी में छिड़ी जुबानी जंग

Supriya Sule Sunetra Pawar: बारामती उपचुनाव को लेकर महाविकास आघाड़ी में दरार। सुप्रिया सुले के सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने के फैसले पर कांग्रेस ने जताई कड़ी नाराजगी।

अनिल सिंह

Baramati Byelection 2026: महाराष्ट्र की बारामती और राहुरी विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों ने महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर दरार पैदा कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के साथ ही बारामती सीट को लेकर कांग्रेस और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच खींचतान शुरू हो गई है। विवाद की जड़ सांसद सुप्रिया सुले का वह बयान है, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ बारामती में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

सुप्रिया सुले के इस एकतरफा फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने साफ कर दिया है कि अगर शरद पवार की एनसीपी मैदान छोड़ती है, तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार करेगी। वडेट्टीवार ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि गठबंधन में शामिल दलों से बिना किसी सलाह-मशविरे के इतना बड़ा निर्णय लेना महाविकास आघाड़ी के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि बारामती में ननद-भाभी के रिश्तों की दुहाई देकर चुनाव को निर्विरोध नहीं छोड़ा जा सकता।

बारामती और राहुरी उपचुनाव का पूरा शेड्यूल

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, बारामती उपचुनाव की प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू होगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल निर्धारित की गई है, जबकि 7 अप्रैल को पत्रों की जांच की जाएगी। उम्मीदवार 9 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। इन सीटों पर मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा और मतगणना 4 मई को की जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई तक संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है, जो राज्य की आगामी राजनीति की दिशा तय करेगी।

अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक समीकरण

बारामती सीट पर यह उपचुनाव पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक विमान हादसे में हुए निधन के कारण हो रहा है। अजित पवार इस सीट का लंबे समय से प्रतिनिधित्व कर रहे थे और उनकी मृत्यु के बाद बारामती में शोक के साथ-साथ सहानुभूति की लहर है। सुप्रिया सुले का सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का फैसला इसी पारिवारिक संवेदना से जुड़ा माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि राजनीतिक मैदान में इस तरह की सहानुभूति गठबंधन के भविष्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

महाविकास आघाड़ी में नेतृत्व और समन्वय की चुनौती

वडेट्टीवार के बयानों ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब गठबंधन में 'बड़े भाई' की भूमिका निभाने या कम से कम बराबरी का सम्मान पाने के लिए तैयार है। उन्होंने शरद पवार की पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले कांग्रेस को भरोसे में लिए बिना किए गए थे। बारामती की यह जंग अब केवल दो परिवारों के बीच नहीं, बल्कि महाविकास आघाड़ी के भीतर वर्चस्व और तालमेल की परीक्षा बन गई है। यदि कांग्रेस अपना स्वतंत्र उम्मीदवार उतारती है, तो बारामती में मुकाबला त्रिकोणीय या उससे भी दिलचस्प हो सकता है।

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