सुप्रिया सुले व देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया) 
पुणे

मंच साझा करने से किया परहेज, पर सुनेत्रा पवार की जीत के लिए एक हुए फडणवीस और सुप्रिया सुले

Baramati By-election News: बारामती उपचुनाव के आखिरी दिन देवेंद्र फडणवीस और सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा पवार के लिए मांगे वोट, लेकिन साझा नहीं किया मंच। जानें इस दिलचस्प राजनीतिक तालमेल की पूरी कहानी।

गोरक्ष पोफली

Baramati By-election 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती हमेशा से ही चर्चा का केंद्र रहा है, लेकिन वर्तमान उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दिन यहाँ जो नजारा दिखा, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में दुर्लभ है। स्वर्गीय अजीत पवार के आकस्मिक निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के समर्थन में प्रदेश की सत्ता और विपक्ष, दोनों के बड़े दिग्गज एक सुर में नजर आए। हालांकि, इस साझा समर्थन के बीच भी राजनीतिक मर्यादा और दूरियां साफ तौर पर दिखाई दीं।

तालमेल ऐसा कि आमना-सामना न हो

प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले, दोनों ने ही सुनेत्रा पवार के लिए जनता से वोट मांगे। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ मंच साझा करने से पूरी तरह परहेज किया। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष प्रकार का 'टाइम-मैनेजमेंट' देखने को मिला। सुप्रिया सुले ने पहले मंच संभाला और अपना संबोधन पूरा कर वहां से रवाना हो गईं। उनके जाने के कुछ ही मिनटों बाद मुख्यमंत्री फडणवीस कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस तालमेल की वजह से दोनों का आमना-सामना नहीं हुआ, जो वर्तमान राजनीतिक समीकरणों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

हमला नहीं, सिर्फ अपील का दौर

आम तौर पर चुनावी रैलियां एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार के लिए जानी जाती हैं, लेकिन यहाँ का माहौल एकदम भिन्न था। दोनों ही दिग्गजों ने अपने भाषणों के दौरान एक-दूसरे पर कोई भी राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। उनका पूरा ध्यान केवल सुनेत्रा पवार को विजयी बनाने और मतदाताओं को बूथ तक लाने पर केंद्रित रहा। सुप्रिया सुले ने महाविकास आघाड़ी (MVA) के कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पूरी ताकत से सुनेत्रा के साथ खड़े रहें, वहीं फडणवीस ने महायुति की ओर से विकास के एजेंडे को मजबूती दी।

रिकॉर्ड जीत की ओर बढ़ती सुनेत्रा

अजीत पवार के निधन के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए किसी भी बड़े दल ने सुनेत्रा पवार के खिलाफ अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। हालांकि मैदान में कुछ निर्दलीय उम्मीदवार जरूर हैं, लेकिन सुनेत्रा की जीत महज एक औपचारिकता मानी जा रही है। अब लड़ाई सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि रिकॉर्ड जनादेश की है। सुप्रिया सुले ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि बारामती को एक नया कीर्तिमान स्थापित करना चाहिए ताकि यह स्वर्गीय अजीत पवार को सच्ची श्रद्धांजलि हो।

बारामती का यह चुनाव यह संदेश दे रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में वैचारिक मतभेदों के बावजूद, कुछ भावनात्मक और पारिवारिक मौकों पर 'मर्यादा की लक्ष्मण रेखा' का पालन आज भी किया जाता है। 23 अप्रैल को होने वाला मतदान अब केवल जीत के अंतर (Margin) का फैसला करेगा।

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