बारामती में ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश सौजन्य-एक्स
पुणे

बारामती का आसमान कितना सुरक्षित? 7 साल में 10 विमान हादसे, अजित पवार हादसे के बाद भी नहीं थमा सिलसिला

Baramati Airfield Aviation Safety: पुणे जिले में विमान हादसों और गंभीर घटनाओं की बढ़ती संख्या ने बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 2011 से अब तक 15 घटनाएं सामने आई हैं।

अंकिता पटेल

Baramati Flight Accident Safety: पुणे जिले के बारामती का आसमान इन दिनों सिर्फ उड़ानों के लिए नहीं, बल्कि विमान सुरक्षा को लेकर उठते सवालों के कारण भी चर्चा में है। छोटे प्रशिक्षण विमानों से लेकर चार्टर्ड जेट तक, पिछले कुछ वर्षों में यहां हुई दुर्घटनाओं और आपात घटनाओं की श्रृंखला ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बारामती एयरफील्ड बढ़ते विमान संचालन के लिए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के साथ पर्याप्त रूप से तैयार है?

9 अगस्त 2026 को यह सवाल एक बार फिर सामने आया। बारामती एयरफील्ड पर कार्वर एविएशन का प्रशिक्षण विमान प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान रनवे से बाहर निकल गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, घटना के दौरान विमान के प्रोपेलर और नोज लैंडिंग गियर को नुकसान पहुंचा, लेकिन विमान में सवार दोनों लोग सुरक्षित रहे। घटना के बाद नागरिक विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं।

यह घटना अपने आप में भले ही जानलेवा नहीं थी, लेकिन इसकी टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। महज कुछ महीने पहले 28 जनवरी 2026 को इसी बारामती एयरफील्ड पर VSR Ventures का Learjet 45 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।

विमान मुंबई से बारामती आ रहा था और लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ। विमान में सवार महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत सभी पांच लोगों की मौत हो गई थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार विमान में दो चालक दल के सदस्य और तीन यात्री थे।

अजित पवार हादसे ने बढ़ाई चिंता

28 जनवरी का हादसा बारामती के विमानन इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक रहा। DGCA के शुरुआती विवरण के मुताबिक, विमान बारामती से संपर्क में था और उस समय दृश्यता करीब 3,000 मीटर बताई गई थी।

पहली लैंडिंग कोशिश में रनवे दिखाई नहीं देने के कारण गो-अराउंड किया गया। इसके बाद विमान ने दोबारा रनवे की ओर आने की सूचना दी और लैंडिंग की अनुमति मिलने के कुछ ही समय बाद रनवे के 11 नंबर छोर के पास आग की लपटें दिखाई दीं। हादसे की विस्तृत वजह की जांच Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है।

इस हादसे ने बारामती एयरफील्ड की कई बुनियादी व्यवस्थाओं पर बहस छेड़ दी—विशेषकर एयर ट्रैफिक कोऑर्डिनेशन, मौसम और दृश्यता की निगरानी, रनवे से जुड़ी सुविधाएं, नेविगेशनल सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को लेकर।

हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी एक हादसे के आधार पर विमानतल की दुर्घटना का कारण तय नहीं किया जा सकता। अजित पवार हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक तकनीकी खराबी, मानवीय भूल, मौसम या अन्य संभावित कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

हादसे के बाद भी नहीं थमा प्रशिक्षण विमानों का सिलसिला

28 जनवरी के हादसे के करीब साढ़े तीन महीने बाद 13 मई 2026 को बारामती के पास एक और प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। Redbird Flight Training Academy का विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी समस्या का सामना करने के बाद गोझुबावी गांव के पास आपात लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान में अकेला प्रशिक्षु पायलट था और वह सुरक्षित बच गया। पुलिस के मुताबिक विमान के एक हिस्से के बिजली के खंभे से टकराने के बाद वह जमीन पर आया।

इसके बाद 9 अगस्त की घटना ने फिर सवाल खड़े कर दिए। यानी जनवरी की जानलेवा दुर्घटना और अगस्त की घटना के बीच बारामती से जुड़े प्रशिक्षण संचालन में दो गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

आंकड़े क्या बताते हैं?

बारामती के उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड को देखें तो तस्वीर सिर्फ 2026 तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यहां और आसपास के इलाकों में प्रशिक्षण विमानों से जुड़ी कई घटनाएं दर्ज हुई हैं।

5 फरवरी 2019: कार्वर एविएशन का प्रशिक्षण विमान इंजन में खराबी आने के बाद बारामती क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। हादसे में प्रशिक्षु पायलट घायल हुआ था।

20 सितंबर 2021: रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी का प्रशिक्षण विमान बारामती हवाई अड्डे पर उतरने की तैयारी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान को काफी नुकसान पहुंचा, हालांकि प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित रहा।

25 जुलाई 2022: कार्वर एविएशन का प्रशिक्षण विमान बारामती से उड़ान भरने के बाद कदबनवाड़ी के पास खेत में आपात स्थिति में उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ। जांच में विमान के ईंधन से जुड़ी समस्या और तय प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं करने जैसे पहलुओं की ओर संकेत किया गया था।

29 जून 2023: कार्वर एविएशन के एक प्रशिक्षण विमान से जुड़ी दुर्घटना बारामती हवाई अड्डे पर सामने आई। इसके बाद रनवे और हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे।

19 अक्टूबर 2023: रेडबर्ड का प्रशिक्षण विमान तकनीकी समस्या के बाद कटफल गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान में मौजूद प्रशिक्षक और प्रशिक्षु को मामूली चोटें आईं।

22 अक्टूबर 2023: पहली घटना के सिर्फ तीन दिन बाद रेडबर्ड का एक और प्रशिक्षण विमान गोझुबावी इलाके में आपात स्थिति में उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें प्रशिक्षक और प्रशिक्षु घायल हुए।

इन लगातार घटनाओं के बाद विमानन महानिदेशालय ने रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी के संचालन पर कार्रवाई की थी। बाद में सुरक्षा जांच और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उड़ान संचालन दोबारा शुरू किया गया।

9 अगस्त 2025: रेडबर्ड के प्रशिक्षण विमान को उड़ान के दौरान पहिए से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। आपात स्थिति में उतरते समय विमान का आगे का पहिया अलग हो गया और विमान रनवे से बाहर चला गया। पायलट सुरक्षित रहा।

28 जनवरी 2026: बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इसमें अजीत पवार समेत पांच लोगों की मौत हुई।

13 मई 2026: रेडबर्ड का प्रशिक्षण विमान तकनीकी खराबी के बाद गोझुबावी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित बच गया।

9 अगस्त 2026: कार्वर एविएशन का प्रशिक्षण विमान उड़ान से पहले रनवे से बाहर निकल गया। विमान में मौजूद लोग सुरक्षित रहे, लेकिन विमान को नुकसान पहुंचा।

यानी उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में बारामती एयरफील्ड और उसके आसपास 2019 से 9 अगस्त 2026 तक कम-से-कम 10 प्रमुख विमान दुर्घटनाएं/गंभीर घटनाएं सामने आती हैं। यह संख्या अलग-अलग स्रोतों द्वारा इस्तेमाल किए गए 'accident', 'incident' और एयरफील्ड के आसपास की घटना के वर्गीकरण के कारण बदल सकती है। इसलिए इसे अंतिम आधिकारिक दुर्घटना-सूची नहीं माना जाना चाहिए।

बारामती विमान हादसा

2023 का सिलसिला सबसे बड़ा चेतावनी संकेत

बारामती में अक्टूबर 2023 की घटनाएं खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। एक ही सप्ताह में दो प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए। दोनों घटनाओं में तकनीकी समस्या और आपात लैंडिंग की स्थिति सामने आई।

इन घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा कि क्या प्रशिक्षण संस्थानों में विमानों की सही तकनीकी स्थिति की नियमित जांच हो रही है? क्या विमानों की समय पर देखरेख और मरम्मत की जा रही है? क्या प्रशिक्षक पायलट प्रशिक्षुओं की उड़ान के दौरान पर्याप्त निगरानी कर रहे हैं? और क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी हैं?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशिक्षण उड़ानों में कम अनुभव वाले पायलट नियमित रूप से उड़ान भरते हैं। ऐसे में विमान की तकनीकी स्थिति, प्रशिक्षक की क्षमता, उड़ान से पहले की जांच और आपात स्थिति में निर्णय लेने की प्रक्रिया का महत्व और बढ़ जाता है।

क्या बारामती एयरफील्ड की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है?

बारामती का एयरफील्ड नियमित बड़े वाणिज्यिक हवाईअड्डे की तरह संचालित नहीं होता। इसे लेकर सबसे अहम चर्चा 'uncontrolled airfield' व्यवस्था की है। जनवरी 2026 के हादसे के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार यहां अलग से पारंपरिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर की व्यवस्था नहीं है और उड़ानों के बीच ट्रैफिक संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में उड़ान प्रशिक्षण संगठनों से जुड़े लोग भूमिका निभाते हैं।

यह व्यवस्था अपने आप में दुर्घटना का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब एक ही एयरफील्ड पर प्रशिक्षण उड़ानें, निजी विमान और चार्टर्ड विमान संचालित हों, तो ट्रैफिक मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन की जिम्मेदारियों को लेकर अधिक मजबूत और स्वतंत्र व्यवस्था की जरूरत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञों ने भी बारामती में प्रशिक्षण संस्थानों की निगरानी, विमान की serviceability, पायलट प्रशिक्षण, प्रशिक्षक पायलटों की क्षमता और लॉगबुक अपडेट जैसे पहलुओं की नियमित जांच की जरूरत बताई है।

सिर्फ रनवे नहीं, पूरी सुरक्षा श्रृंखला की जांच जरूरी

बारामती की घटनाओं को केवल 'रनवे से विमान फिसल गया' या 'पायलट से गलती हुई' जैसे सीमित निष्कर्षों में देखना जोखिमपूर्ण होगा।

विमान सुरक्षा एक पूरी श्रृंखला पर निर्भर करती है:-

  • विमान की नियमित तकनीकी जांच

  • उड़ान से पहले विमान की पूरी जांच

  • पर्याप्त ईंधन की उपलब्धता

  • प्रशिक्षु पायलट का पर्याप्त प्रशिक्षण

  • प्रशिक्षक की निगरानी

  • मौसम और दृश्यता की सही जानकारी

  • रनवे और आसपास के रास्तों की अच्छी स्थिति

  • विमानों के बीच सही तालमेल

  • आपात स्थिति में तुरंत मदद

  • आग बुझाने और बचाव के पर्याप्त साधन

  • दुर्घटना के बाद समय पर और निष्पक्ष जांच

इनमें से किसी एक कड़ी में कमजोरी भी जोखिम बढ़ा सकती है।

मसलन, 2022 के VT-ALI हादसे की AAIB जांच में fuel monitoring और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। इससे यह साफ होता है कि प्रशिक्षण विमान हादसों में केवल मशीन की खराबी को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है; operational discipline भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जांच रिपोर्टों में देरी भी चिंता का विषय

एक और बड़ा सवाल दुर्घटनाओं की जांच और उनकी अंतिम रिपोर्ट को लेकर है। AAIB की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2026 में अब तक कई दुर्घटनाएं और गंभीर घटनाएं जांच के दायरे में रही हैं। बारामती की अक्टूबर 2023 की कुछ घटनाओं की अंतिम रिपोर्टों को लेकर भी लंबित स्थिति की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।

दुर्घटना की जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं होता। उसका सबसे महत्वपूर्ण मकसद यह पता लगाना होता है कि भविष्य में वैसी दुर्घटना दोबारा न हो। इसलिए किसी घटना की अंतिम रिपोर्ट में देरी का मतलब यह भी हो सकता है कि उससे मिलने वाले safety lessons और corrective actions समय पर लागू नहीं हो पा रहे हैं।

अब सरकार के सामने क्या सवाल?

बारामती में लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब केवल हर हादसे के बाद जांच का आदेश देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जरूरत एक व्यापक independent aviation safety audit की है।

सरकार और DGCA को कम-से-कम इन बिंदुओं पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए—

पहला सवाल: बारामती हवाई अड्डे के रनवे और आसपास के क्षेत्र की तकनीकी जांच आखिरी बार कब हुई थी?

दूसरा: यहां से उड़ान भरने वाले सभी प्रशिक्षण विमानों की नियमित तकनीकी जांच कितनी बार होती है?

तीसरा: प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षक पायलटों की योग्यता और अनुभव की जांच किस तरह की जाती है?

चौथा: प्रशिक्षु पायलटों को आपात स्थिति से निपटने का कितना प्रशिक्षण दिया जाता है?

पांचवां: खराब मौसम और कम दृश्यता में उड़ानों को लेकर क्या स्पष्ट नियम हैं?

छठा: दुर्घटना या आपात स्थिति में दमकल, चिकित्सा और बचाव दल कितनी जल्दी मौके पर पहुंच सकता है?

सातवां: 2023 से लेकर 2026 तक हुई घटनाओं से मिली सुरक्षा संबंधी सीख पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

'हादसा नहीं हुआ' को सुरक्षा का प्रमाण नहीं माना जा सकता

बारामती की हालिया घटनाओं में एक बात लगातार दिखाई देती है कई बार पायलट सुरक्षित बच जाते हैं। यह निश्चित रूप से राहत की बात है, लेकिन इसे सुरक्षा व्यवस्था के सफल होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विमान दुर्घटना में जानमाल का नुकसान होना अंतिम परिणाम है। हादसा होने से पहले कई ऐसी घटनाएं होती हैं, जो आने वाले बड़े खतरे का संकेत देती हैं। जैसे विमान का रनवे से बाहर निकल जाना, उतरते समय जोर से जमीन से टकराना, मजबूरी में विमान उतारना, तकनीकी खराबी आना या आपात स्थिति में विमान को उतारना। अगर बारामती में इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, तो इन सभी घटनाओं को एक साथ देखते हुए यह जांचना जरूरी है कि कहीं सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी कमी तो नहीं है। बारामती के मामले में यही सबसे बड़ा सवाल है।

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अब 'अगले हादसे' का इंतजार नहीं

  • 28 जनवरी की त्रासदी के बाद उम्मीद थी कि बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा होगी। 13 मई की घटना ने दिखाया कि प्रशिक्षण संचालन में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 9 अगस्त की नई घटना ने इस बहस को फिर सामने ला दिया है।

  • जरूरत किसी एक संस्था या पायलट को कटघरे में खड़ा करने की नहीं, बल्कि पूरे aviation safety ecosystem की जांच करने की है।

  • बारामती में उड़ान प्रशिक्षण चलता है, निजी और चार्टर्ड विमान आते-जाते हैं और आसपास आबादी वाले इलाके भी हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का स्तर केवल विमान में बैठे लोगों तक सीमित नहीं रह सकता। किसी आपात स्थिति में जमीन पर मौजूद लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

  • इसलिए अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि अगला विमान हादसा कब होगा और उसमें कितने लोग बचेंगे।

  • सवाल यह होना चाहिए कि बार-बार मिल रहे safety warnings को गंभीरता से लेकर अगला हादसा होने से पहले कितनी कमियों को दूर किया जाएगा?

  • बारामती का आसमान तभी सुरक्षित माना जा सकेगा, जब हर घटना के बाद केवल जांच नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर व्यवस्था में वास्तविक सुधार भी दिखाई दे।

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