अमोल मिटकरी द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गई अघोरी पूजा की तस्वीर (सोर्स: एक्स@amolmitkari22) 
पुणे

अजित पवार के विमान हादसे से पहले हुई थी अघोरी पूजा! अमोल मिटकरी के दावे में महाराष्ट्र में सियासी तूफान

Ajit Pawar Plane Crash: अमोल मिटकरी ने अजित पवार के खिलाफ अघोरी पूजा का सनसनीखेज दावा कर हड़कंप मचा दिया है। बकरे की बलि और आधी रात को तंत्र-मंत्र के आरोपों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

आकाश मसने

Amol Mitkari Aghori Puja Claims: महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोप का दौर तो पुराना है, लेकिन इस बार मामला बेहद चौंकाने वाला और 'अंधविश्वास' की डरावनी गलियों से जुड़ा है। NCP विधायक अमोल मिटकरी ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के खिलाफ अघोरी प्रथाओं और तांत्रिक पूजा किए जाने का दावा कर राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। नासिक के कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब बारामती और काटेवाड़ी के ये खुलासे आग की तरह फैल रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

अमाेल मिटकरी ने दावा किया है कि नवंबर महीने में भी अजित पवार के घर और कार्यालय के आसपास इस तरह की अघोरी पूजा की गई थी। अब उन्होंने एक बार फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि विद्या प्रतिष्ठान की एआई बिल्डिंग के निर्माण स्थल के पास आधी रात को अघोरी पूजा की गई थी। उन्होंने इससे जुड़े कुछ फोटो भी साझा किए हैं। मिटकरी के अनुसार, अगले ही दिन सुबह अजीत पवार वहां निरीक्षण के लिए आने वाले थे।

राजनीतिक ताकतों पर इशारा

अमोल मिटकरी ने अपने पोस्ट में कहा कि बारामती में सहयोग घर, काटेवाड़ी स्थित घर और विद्या प्रतिष्ठान जैसे स्थानों पर इस तरह की गतिविधियां बाहरी लोगों के लिए संभव नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों और उनके स्थानीय सहयोगियों का हाथ हो सकता है। एक अन्य पोस्ट में मिटकरी ने लिखा कि 28 दिसंबर 2025 की रात विद्या प्रतिष्ठान के पास अघोरी पूजा की गई, जबकि अगले दिन सुबह अजित पवार वहां निर्माण कार्य का निरीक्षण करने वाले थे। उन्होंने इसे भयावह बताते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

बकरे को उल्टा लटकाकर पूजा

मिटकरी ने यह भी दावा किया कि काटेवाड़ी इलाके में अजीत पवार के बंगले के सामने एक बकरे को उल्टा लटकाकर अघोरी पूजा की गई थी। स्थानीय लोगों के हवाले से उन्होंने कहा कि यह घटना कथित तौर पर विमान हादसे से पहले हुई थी और करीब चार महीने बाद भी उसके निशान वहां देखे गए। उन्होंने सवाल उठाया कि अंधश्रद्धा का विरोध करने वाले नेता के खिलाफ इस तरह की गतिविधियां किसने और क्यों कीं। मिटकरी ने कहा कि यह 'भयावह सच' जनता के सामने आना चाहिए।

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